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Trade Unions Black Day: 1 अप्रैल को देशभर में ‘काला दिवस’, नए लेबर कोड्स के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे श्रमिक संगठन

Labour Codes India: केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने नए लेबर कोड्स के खिलाफ 1 अप्रैल 2026 को 'काला दिवस' मनाने का ऐलान किया है। जानें क्यों वेतन, सामाजिक सुरक्षा और औद्योगिक संबंधों से जुड़ी इन नई संहिताओं का विरोध हो रहा है और इस प्रदर्शन का आम जनता व उद्योगों पर
Published on: 28 March 2026
Trade Unions Black Day: 1 अप्रैल को देशभर में 'काला दिवस', नए लेबर कोड्स के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे श्रमिक संगठन

Trade Unions Black Day: देश के प्रमुख मजदूर संगठनों ने मिलकर फैसला लिया है कि वे 1 अप्रैल 2026 को पूरे भारत में ‘काला दिवस’ मनाएंगे। यह विरोध प्रदर्शन सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए लेबर कोड्स (श्रम संहिताओं) के खिलाफ है, जिन्हें 21 नवंबर 2025 से प्रभावी किया गया है। इन नए नियमों में वेतन, इंडस्ट्रियल रिलेशन, सोशल सिक्योरिटी और वर्किंग कंडीशन से जुड़े बदलाव शामिल हैं।

मजदूर संगठनों का कहना है कि ये नए कानून पूरी तरह से कंपनियों के फायदे के लिए बनाए गए हैं और इनमें कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की गई है। उनका आरोप है कि सरकार सिर्फ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार को आसान बनाने पर ध्यान दे रही है, जबकि मजदूरों के अधिकारों को ताक पर रख दिया गया है। संगठनों का मानना है कि इन कानूनों के आने से कामगारों का शोषण बढ़ेगा, इसलिए वे लंबे समय से इन्हें रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि 12 फरवरी 2026 को हुई बड़ी हड़ताल के बाद भी सरकार ने इस मुद्दे पर बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। संगठनों का यह भी कहना है कि इन कानूनों को बनाते समय उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया और न ही किसी बड़े सम्मेलन में इस पर चर्चा हुई। यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के भी खिलाफ है, जिनका भारत हिस्सा है। इसी अनदेखी और नाराजगी के चलते अब श्रमिक संगठनों ने देशभर में विरोध करने का रास्ता चुना है।

मजदूरों पर बढ़ता बोझ और उनके हक की लड़ाई
मजदूर संगठनों का मानना है कि नए श्रम कानून (लेबर कोड्स) कामगारों की स्थिति को सुधारने के बजाय उन्हें पुराने दौर की गुलामी और शोषण की तरफ धकेल रहे हैं। उनका कहना है कि जो मजदूर अपनी मेहनत से देश की तरक्की में योगदान देते हैं, अब उन्हीं के हक छीने जा रहे हैं। इन कानूनों से न केवल उनकी मेहनत का मोल कम होगा, बल्कि उनके एकजुट होने और अपनी मांगों को रखने की ताकत भी कमजोर पड़ जाएगी। संगठनों ने आम जनता से भी साथ आने की अपील की है ताकि मजदूरों के कानूनी अधिकारों को बचाया जा सके।

1 अप्रैल को ‘काला दिवस’ की तैयारी
सरकार के इन फैसलों के खिलाफ मजदूर संगठनों ने 1 अप्रैल को पूरे देश में ‘काला दिवस’ मनाने का फैसला किया है। इस विरोध को जताने के लिए मजदूर अपने काम की जगह पर काली पट्टी या बैज पहनेंगे और लंच के समय शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएंगे। कहीं-कहीं रैलियां और प्रदर्शन भी किए जाएंगे। इस आंदोलन की खास बात यह है कि अलग-अलग राज्यों की कमेटियां अपनी सुविधा के अनुसार विरोध का तरीका चुन सकती हैं।

इस मुहिम में किसानों का साथ (संयुक्त किसान मोर्चा) भी मजदूरों को मिल रहा है। देश के लगभग सभी बड़े संगठन जैसे एआईटीयूसी (AITUC), सीटू (CITU) और सेवा (SEWA) इसमें एक साथ खड़े हैं। उनका साफ कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ कानून बदलने की नहीं है, बल्कि यह मजदूरों के आत्मसम्मान और उनकी बुनियादी आजादी को बचाने का संघर्ष है।

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