Chhattisgarh High Court News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य के सरकारी स्कूलों में गाए जाने वाले हिंदू प्रार्थनाओं को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले किसी भी छात्र को हिंदू प्रार्थना गाने के लिए बाध्य या मजबूर नहीं किया जा सकता है।
हाई कोर्ट का यह बड़ा फैसला राज्य सरकार द्वारा पूर्व में जारी किए गए एक सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका पर आया है। दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने 12 जून को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें राज्य भर के सभी सरकारी स्कूलों में हिंदू प्रार्थनाएं कराना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया था।

सरकार के इस आधिकारिक फैसले और आदेश को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 2 जुलाई को इस फैसले पर रोक लगा दी और छात्रों के अधिकार में यह आदेश सुनाया।
बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा 12 जून को जारी किए गए विवादित सर्कुलर में स्कूलों के भीतर सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र, गुरु मंत्र और दूसरी अन्य हिंदू प्रार्थनाएं कराना अनिवार्य श्रेणी में रखा गया था। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस सर्कुलर की वैधता के खिलाफ दायर याचिका पर गंभीर सुनवाई की और साफ किया कि किसी भी बच्चे को ये धार्मिक प्रार्थनाएं गाने पर कतई मजबूर नहीं किया जाएगा।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अमितेंद्र प्रसाद ने राज्य सरकार के उस बयान को भी रिकॉर्ड पर दर्ज किया, जिसमें कहा गया था कि इस सर्कुलर को जून की शुरुआत में तैयार कर जारी किया गया था, लेकिन अब तक इसे धरातल पर लागू नहीं किया गया है।
सरकार के इसी आधिकारिक बयान को मुख्य आधार बना कर हाई कोर्ट ने फिलहाल इस याचिका पर आगे की सुनवाई को बंद कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं को एक विशेष छूट भी प्रदान की है।
हाई कोर्ट ने कहा कि अगर भविष्य में किसी भी बच्चे को इन प्रार्थनाओं में जबरन हिस्सा लेने के लिए मजबूर किया जाता है, तो याचिकाकर्ता इस शिकायत के साथ फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। हाई कोर्ट ने सचेत किया कि अगर किसी भी तरह की जबरदस्ती उनके संज्ञान में आती है तो उस पर उचित कानूनी एक्शन लिया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, इस सर्कुलर की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली यह याचिका छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अब्दुल सलाम रिजवी, अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व चेयरमैन महेंद्र छाबड़ा और बिलासपुर के स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता शफीक अहमद द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई थी। इन सभी ने स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट के इस अनिवार्य आदेश को अदालत में चुनौती दी थी।
गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए मूल सर्कुलर में राज्य भर के सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का पाठ कराने का विस्तृत निर्देश शामिल था। इतना ही नहीं, इसमें महान हस्तियों की जीवनी पढ़ने, मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) के दौरान भोजन मंत्र पढ़ने और स्कूल की छुट्टी होने से ठीक पहले गायत्री मंत्र और शांति मंत्र पढ़ने को भी पूरी तरह अनिवार्य घोषित किया गया था।
















