Inflation Forecast and GDP Growth Rate: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC Update ) ने FY26 साइकिल की अंतिम बैठक में नीतिगत दरों को 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही मौद्रिक रुख को भी ‘न्यूट्रल’ ही बनाए रखा गया है।
RBI ने FY27 के लिए महंगाई के अनुमान को संशोधित करते हुए ऊपर की ओर बढ़ाया है, वहीं आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए भारत की विकास दर को लेकर अपना दृष्टिकोण और मजबूत किया है।
महंगाई के अनुमान में संशोधन
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने FY27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई के अनुमान को बढ़ा दिया है। यह बदलाव पहले की उस उम्मीद से अलग है, जिसमें महंगाई के और नीचे आने की संभावना जताई गई थी। FY27 की पहली तिमाही के लिए CPI महंगाई अब 4% और दूसरी तिमाही के लिए 4.2% रहने का अनुमान है।
RBI के अनुसार, “महंगाई के आउटलुक में यह मामूली बढ़ोतरी मुख्य रूप से कीमती धातुओं की कीमतों में उछाल के कारण है, जिसका असर करीब 60 से 70 बेसिस पॉइंट तक रहा है। हालांकि, अंतर्निहित महंगाई अभी भी नियंत्रित स्तर पर है।”
FY26 के लिए भी बदले अनुमान
FY26 को लेकर भी MPC ने महंगाई के अनुमानों में हल्का संशोधन किया है। अब पूरे वित्तीय वर्ष में औसत महंगाई 2.1% रहने का अनुमान है, जबकि चौथी तिमाही (Q4) में यह 3.2% तक पहुंच सकती है।
इससे पहले दिसंबर की MPC बैठक में FY27 की Q4 महंगाई 2.9%, Q1 में 3.9% और Q2 में 4.0% रहने का अनुमान जताया गया था।
भारत की ग्रोथ पर RBI का सकारात्मक नजरिया
रिज़र्व बैंक ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए भारत के आर्थिक विकास अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित किया है। FY27 की पहली छमाही के लिए रियल GDP ग्रोथ को बेहतर आंकते हुए, RBI अब Q1 में 6.9% और Q2 में 7% की वृद्धि का अनुमान लगा रहा है।
बैंक के मुताबिक, जोखिम दोनों ओर संतुलित बने हुए हैं। यह संकेत देता है कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू मांग मजबूत बनी रह सकती है। नीतिगत दरों को स्थिर रखने का फैसला भी आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रहा है।
2026-27 के लिए ग्रोथ अनुमान और मजबूत
RBI ने 2026-27 के लिए अपने शुरुआती विकास अनुमानों को भी बढ़ाया है। अब पहली तिमाही में 6.9% और दूसरी तिमाही में 7.0% रियल GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है, जबकि पहले यह क्रमशः 6.7% और 6.8% था। सेंट्रल बैंक का मानना है कि उपभोग और निवेश में लगातार तेजी के चलते आने वाले वित्तीय वर्ष में भी देश की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहेंगी।














