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रोजगार संसद में गूंजा नारा “नफरत नहीं रोजगार चाहिए ,जीने का अधिकार चाहिए”

रोजगार संसद में गूंजा नारा "नफरत नहीं रोजगार चाहिए ,जीने का अधिकार चाहिए"

शिमला|
नफरत नहीं रोजगार चाहिए जीने का अधिकार चाहिए ,
पूरा देश करे पुकार, रोजगार दो रोजगार।
इन नारों से रविवार को, कालीबाड़ी, शिमला का प्रांगण गूंज उठा। मौका था संयुक्त रोजगार आंदोलन समिति के बैनर तले आयोजित रोजगार संसद का। इस रोजगार संसद में प्रदेश भर के संघर्षरत संगठनों के सैकड़ों प्रतिनिधि एक साथ एक मंच पर शामिल हुए।

SRAS आयोजन समिति के केंद्रीय प्रभारी कामिनी तिवारी ने बताया देश में बेरोजगारी की व्यापक समस्या का समाधान सिर्फ राष्ट्रीय रोजगार नीति है शिमला में आयोजित इस रोजगार संसद में हिमाचल के 50 से ज्यादा संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए जिन्होंने राष्ट्रीय रोजगार नीति पर अपनी बात रखी एवं 16 अगस्त से दिल्ली में होने वाले आंदोलन को लेकर समर्थन व्यक्त किया।

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इस रोजगार संसद में छात्र, युवा, शिक्षक, महिला, पत्रकार, दलित, आदिवासी, व्यापारिक, ट्रेड यूनियन, किसान यूनियन, सामाजिक संस्थाएं, सामाजिक संगठन, गैर सरकारी संस्थाओं, मेडिकल एसोसिएशन टीचर्स एसोसिएशन जैसे 50 से ज्यादा प्रतिनिधियों एवं 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने रोजगार संसद में बेरोजगारी की ज्वलंत समस्या पर अपनी बात रखी।

सभी संगठनों ने राष्ट्रीय रोजगार नीति के ड्राफ्ट पर सहमति जताते हुए कुछ सुझाव दिए। साथ ही 16 अगस्त से दिल्ली में आंदोलन करने और इसमें हिमाचल प्रदेश से हजारों प्रतिनिधियों की भागीदारी का एलान किया गया। इसके लिए आगामी दिनों में जिलों में सम्मेलन किए जायेंगे और प्रदेश के कॉलेज यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम होंगे।

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इस कार्यक्रम में स्टेट कमेटी के सदस्य रणबीर सिंह मंधोत्रा, पंकज दर्शी, सुशील पटियाल, दुर्गेश कटोच, प्रदीप सिंह, रोशनलाल, विवेक चौहान, सुशील बहल, अनिल कुमार, अनिल कपूर, रेणु, वंदना, जतिन मुसाफिर, मान सिंह, रवि तोमर, आशिमा आदि उपस्थित रहे।

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