HP High Court: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के कर्मचारी वर्ग के अधिकार में एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत तय करते हुए ऐतिहासिक व्यवस्था दी है। अदालत के आदेशानुसार, यदि किसी विभागीय परीक्षा का परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाता है, तो उसी तिथि को परीक्षा पास करने की वास्तविक तारीख माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी पूरी तरह स्पष्ट किया है कि राजपत्र में आधिकारिक अधिसूचना जारी होने में हुई प्रशासनिक देरी के आधार पर योग्य कर्मचारियों को उनकी पदोन्नति और वरिष्ठता से वंचित नहीं किया जा सकता। यह दूरगामी फैसला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता विजय कुमार शर्मा की ओर से दाखिल की गई याचिका को स्वीकार करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय दिया।

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2011 और वर्ष 2012 में राज्य सरकार द्वारा जारी की गई अंडर सेक्रेटरी पद की सीनियोरिटी लिस्ट को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने सितंबर 2008 में आयोजित विभागीय परीक्षा में भाग लिया था और उसे सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया था। इस परीक्षा का परिणाम 1 अक्टूबर 2008 को संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया था। इसके बावजूद, सरकार ने इस परिणाम की संयुक्त आधिकारिक अधिसूचना जारी करने में समय लिया और इसे 11 नवंबर 2008 को जारी किया।
इसी बीच, 4 नवंबर 2008 को विभाग में अंडर सेक्रेटरी के पद रिक्त हुए। विभाग ने पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करते समय याचिकाकर्ताओं को यह तर्क देकर अयोग्य घोषित कर दिया कि 4 नवंबर तक उनका रिजल्ट आधिकारिक रूप से अधिसूचित नहीं हुआ था। प्रशासनिक तंत्र की इस दलील के कारण याचिकाकर्ताओं के कनिष्ठ कर्मचारियों को वर्ष 2008 की रिक्तियों पर प्रमोट कर दिया गया, जबकि परीक्षा पहले पास करने के बावजूद याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2009 की रिक्तियों में धकेल दिया गया।
याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने प्रशासनिक विभाग के इस रवैये को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कानून की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के लागू होने के बाद डिजिटल माध्यम से दी गई कोई भी जानकारी पूरी तरह से वैध और कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
अदालत ने कहा कि जैसे ही 1 अक्टूबर 2008 को विभागीय परीक्षा का परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर डाला गया, वह सार्वजनिक हो गया। उसी क्षण याचिकाकर्ताओं ने पदोन्नति के लिए आवश्यक कानूनी योग्यता हासिल कर ली थी। राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशन में हुई देरी का खामियाजा कर्मचारियों को अपनी वरिष्ठता गंवाकर नहीं भुगतना पड़ेगा। इस फैसले के बाद राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े मामलों में सीधा कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा।


















