Shimla SBI Cyber Fraud Case: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक खाताधारक से 16 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। शिमला की सदर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले में वांछित आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है।
पुलिस आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर शिमला लेकर आई, जिसके बाद उसे अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को 22 अगस्त 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजने के आदेश दिए हैं। अब पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी से कड़ाई से पूछताछ कर धोखाधड़ी के इस नेटवर्क और अन्य पहलुओं की परतें खंगाल रही है।

11 से 14 अक्टूबर के बीच खाते से गायब हुए 16 लाख रुपये
पुलिस से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता के एसबीआई बैंक खाते से 11 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2025 के बीच कुल 16 लाख रुपये की राशि अवैध और धोखाधड़ीयुक्त तरीके से निकाली गई थी। पीड़ित की शिकायत पर सदर शिमला पुलिस स्टेशन में 5 दिसंबर 2025 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अपराध की गंभीरता को देखते हुए केस नंबर 105/25 पंजीकृत कर जांच शुरू की गई।
मामला दर्ज करने के पश्चात पुलिस टीम ने बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। इस तकनीकी जांच के दौरान दिल्ली के यमुना विहार निवासी अमान अली, पुत्र शमशाद अली की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण सामने आए। आरोपी की पहचान स्पष्ट होने के बाद शिमला पुलिस ने लगातार उसकी लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी।
दिल्ली के भजनपुरा इलाके से दबोचा गया आरोपी
तकनीकी इनपुट और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर शिमला पुलिस की विशेष टीम ने 19 अगस्त 2026 को दिल्ली के भजनपुरा क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी और आरोपी अमान अली को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उसे ट्रांजिट रिमांड पर शिमला लाया गया।
मामले की पुष्टि करते हुए शिमला के पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने बताया कि अदालत ने आरोपी को 22 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर सौंपा है। पुलिस रिमांड अवधि के दौरान आरोपी से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। बता दें कि जांच अधिकारी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि साइबर धोखाधड़ी की इस पूरी वारदात को किस तकनीक से अंजाम दिया गया था, चुराया गया पैसा कहां ट्रांसफर किया गया और क्या इस गिरोह में अन्य लोग या अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट भी शामिल हैं।















