Jubbal Murder Case: शिमला जिले के जुब्बल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दोची मोड़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-705 पर हुए ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी को शिमला पुलिस ने सफलतापूर्व सुलझा लिया है। यह सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद से ही इलाके में सनसनी फैली हुई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस हत्याकांड में संलिप्त दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।
जानकारी के मुताबिक दोनों आरोपी नेपाली मूल के बताए जा रहे हैं, जिन्हें पुलिस ने शिमला के टूटीकंडी बस स्टैंड से धर दबोचा। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों आरोपी वारदात को अंजाम देने के बाद नेपाल भागने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस की सतर्कता ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। इस मामले में पुलिस की आगामी कानूनी जांच और पूछताछ लगातार जारी है।
कैसे हुआ था मामले का खुलासा
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 18 अक्टूबर 2026 की रात को हुई जब साहिल नामक शिकायतकर्ता अपने साथियों के साथ हाटकोटी से मंडोल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर दोची के समीप सड़क किनारे खून से लथपथ अवस्था में पड़े एक व्यक्ति पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद दोनों दल मौके पर पहुंचे।
घटनास्थल पर जांच के दौरान चिकित्सकों ने उस व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने जब घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, तो मुख्य सड़क से नीचे नाले की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर भी खून के निशान मिले। इन साक्ष्यों और परिस्थितियों को आधार बनाते हुए पुलिस ने हत्या की आशंका जताई और तुरंत गहनता से जांच शुरू कर दी।
मृतक की पहचान और कानूनी कार्रवाई
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस संबंध में पुलिस थाना जुब्बल में 19 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का औपचारिक मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने तकनीकी और जमीनी साक्ष्यों के आधार पर मृतक की पहचान सुनिश्चित की। मृतक की पहचान 33 वर्षीय धीरेन्द्र थापा पुत्र भीम बहादुर के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नेपाल का रहने वाला था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वह जुब्बल तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव बाउली और डाकघर दोची के क्षेत्र में रहकर मजदूरी का काम करता था। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं, ताकि मौत के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक पुष्टि की जा सके।
शराब के नशे में हुआ था खूनी संघर्ष
पुलिस की शुरुआती जांच में एक बेहद चौकाने वाला खुलासा हुआ है जिससे हत्या की पूरी परतें खुलती चली गईं। जांच में यह सामने आया कि घटना से ठीक पहले मृतक धीरेन्द्र थापा और दोनों आरोपी एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। शराब पीने के दौरान किसी बात को लेकर उनके बीच अचानक तीखी बहस और झगड़ा शुरू हो गया।
पुलिस के अनुसार इसी झगड़े और आपसी झड़प के दौरान धीरेन्द्र थापा की मौत हो गई। हत्या करने के बाद आरोपियों ने साक्ष्यों को मिटाने और मामले को दूसरा रूप देने के लिए एक शातिर चाल चली। आरोप है कि दोनों ने धीरेन्द्र के शव को राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे लाकर छोड़ दिया, ताकि किसी को भी यह घटना आपसी झगड़े या हत्या न लगकर एक सड़क दुर्घटना प्रतीत हो।
गिरफ्तारी और आरोपियों की पहचान
वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस से बचने के लिए दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन पूरी तरह बंद कर दिए और घटनास्थल से फरार होने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक वे पहले खड़ापत्थर पहुंचे और वहां से एक पिकअप वाहन में लिफ्ट लेकर ठियोग के समीप पहुंचे। पुलिस द्वारा जगह-जगह की गई नाकाबंदी के चलते वे आगे नहीं बढ़ पाए और उन्हें अपनी रात जंगल में बितानी पड़ी। इसके बाद वे शिमला के रास्ते नेपाल भागने की फिराक में थे।
इस बीच शिमला पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और स्थानीय स्तर पर गुप्त सूचनाएं जुटाईं। इन पुख्ता सुरागों के आधार पर जाल बिछाते हुए पुलिस टीम ने दोनों आरोपियों को शिमला के आईएसबीटी से दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सूर्य दमाई उर्फ अनिश (27 वर्ष, निवासी जिला गुल्मी, नेपाल) और सुमन खड़का (27 वर्ष, निवासी जिला सल्यान, नेपाल) के रूप में हुई है। पुलिस अब दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है और मामले में आगे की कड़ियां जोड़ने के लिए गहन जांच जारी है। एएसपी शिमला मेहर पंवर ने इस बारे में मीडिया को जानकारी दी।




















