Kasauli Disaster: कसौली विधानसभा से भाजपा मंडल अध्यक्ष लक्ष्मी दत्त अत्री ने विधायक विनोद सुल्तानपुरी द्वारा आपदा के समय अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने तथा भाजपा पर राजनीति करने के लगाए गए आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा की इस घड़ी में प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी जिस तरह दिन-रात राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं, भाजपा उनके इन सराहनीय प्रयासों की पूरी तरह सराहना करती है।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने इन कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई है और उनके काम की तारीफ होनी चाहिए। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विधायक को अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों और नाकामियों को अधिकारियों की मेहनत के पीछे छिपाने का कतई प्रयास नहीं करना चाहिए। जनता के सामने असल मुद्दों पर बात होनी बेहद आवश्यक है।
अत्री ने विधायक से सीधा सवाल पूछते हुए कहा कि वे पहले यह स्पष्ट करें कि परवाणू नगर परिषद और आसपास की पंचायतों के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए उन्होंने अब तक कुल कितना फंड जारी करवाया है और कितनी वास्तविक आर्थिक सहायता धरातल पर लोगों तक पहुंची है। आपदा के समय केवल बयानबाजी करने से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता, बल्कि जनप्रतिनिधि की प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रभावित लोगों और स्थानीय संस्थाओं के लिए आवश्यक आर्थिक संसाधन उपलब्ध करवाए।
विधायक द्वारा केंद्र से फंड लाने के दावे पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि पहले विधायक यह जनता को बताएं कि जो फंड केंद्र सरकार की ओर से भेजा जाता है, उसे प्रदेश सरकार समय पर और सही तरीके से खर्च क्यों नहीं कर पा रही है। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान परवाणू के लिए करीब 46 करोड़ रुपये की बड़ी सीवरेज योजना उपलब्ध करवाई गई थी, लेकिन आज भी शहर की सीवरेज व्यवस्था की दयनीय स्थिति लोगों के सामने है और इस योजना के उचित रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
करोड़ों रुपये की लागत वाली इस योजना के बावजूद यदि आम जनता को सीवरेज की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो वर्तमान व्यवस्था अपनी इस जिम्मेदारी से किसी भी सूरत में बच नहीं सकती। इसके अलावा उन्होंने खड़ीन औद्योगिक क्षेत्र के लिए केंद्र से आए करीब 10 करोड़ रुपये का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि यह राशि प्रदेश सरकार का आवश्यक हिस्सा समय पर नहीं डाले जाने के कारण अब वापस लौटने की स्थिति तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार की तरफ से पैसा उपलब्ध करवाया गया था, तो प्रदेश सरकार का हिस्सा समय पर जारी करवाने के लिए विधायक ने अपनी तरफ से क्या ठोस प्रयास किए। केंद्र से फंड लाने की बड़ी बातें करने से पहले विधायक को अपनी सरकार से आए हुए धन को सही ढंग से खर्च करवाने और लंबित पड़ी योजनाओं को पूरी तरह से धरातल पर उतारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
परवाणू की महत्वपूर्ण हाईवे कनेक्टिविटी को लेकर भी अत्री ने विधायक से स्पष्ट जवाब मांगा और कहा कि आज यदि इस दिशा में कट के काम को लेकर कुछ प्रयास हो रहे हैं, तो इसमें परवाणू इंडस्ट्री एसोसिएशन के सहयोग और उनके प्रयासों को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने विधायक से पूछा कि परवाणू की हाईवे कनेक्टिविटी के लिए उनके द्वारा अब तक कितना फंड स्वीकृत करवाया गया है और इस पूरे मामले में उनका वास्तविक योगदान क्या रहा है।
परवाणू प्रदेश का एक बेहद महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है और यहां बेहतर हाईवे कनेक्टिविटी केवल उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि हजारों स्थानीय नागरिकों की भी मुख्य जरूरत है। इसलिए इस बेहद गंभीर मुद्दे पर केवल बयानबाजी करने के बजाय धरातल पर ठोस काम दिखाई देना चाहिए। परवाणू की जनता सब कुछ बहुत करीब से देख रही है कि कौन सा व्यक्ति जमीन पर उतरकर काम कर रहा है और कौन केवल बयानबाजी तक सीमित है।
अत्री ने कड़ा कटाक्ष करते हुए कहा कि स्थानीय जनता के बीच यह धारणा अब तेजी से मजबूत होती जा रही है कि परवाणू विधायक के लिए एक पिकनिक स्पॉट बनकर रह गया है, जहां वे समय-समय पर आते हैं, केवल दौरे करते हैं और अपनी फोटो खिंचवाते हैं। शहर की वास्तविक मूलभूत समस्याओं और विकास योजनाओं के लिए उनके स्तर पर अपेक्षित और गंभीर प्रयास बिल्कुल नजर नहीं आ रहे हैं।
यदि विधायक इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हैं, तो उन्हें राजनीति से ऊपर उठकर जनता के सामने अपने पूरे कार्यकाल का स्पष्ट हिसाब रखना चाहिए कि परवाणू के लिए कितनी धनराशि स्वीकृत या जारी करवाई गई, कितनी विकास योजनाएं पूरी हुईं और कितनी योजनाएं आज भी फाइलों में लंबित पड़ी हैं। भाजपा मंडल अध्यक्ष ने दोहराया कि आपदा के समय प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है और भाजपा हर कदम पर उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि विधायक अपनी प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों से बचने के लिए अधिकारियों के अच्छे कार्यों को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में पेश करें। परवाणू की जनता अब केवल खोखले बयानों से संतुष्ट होने वाली नहीं है, बल्कि वह विकास कार्यों, आए हुए फंड और योजनाओं का वास्तविक हिसाब मांग रही है।
विधायक को अपनी कार्यगत नाकामियों को अधिकारियों की कड़ी मेहनत के पीछे छिपाने के बजाय उन सभी गंभीर सवालों का साफ-साफ जवाब देना चाहिए जो परवाणू की जागरूक जनता लंबे समय से पूछती आ रही है। भाजपा का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय किसी भी प्रकार की ओछी राजनीति करना नहीं है, बल्कि विषम परिस्थितियों में जनता की सेवा कर रहे प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों का हौसला बढ़ाना है। साथ ही, जनप्रतिनिधियों को उनकी मुख्य जिम्मेदारियों की समय पर याद दिलाना भी एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा है।


















