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NGT Order Sirmour: सिरमौर में अवैध निर्माण और मलबे पर NGT का बड़ा एक्शन! DC को मिले कड़े निर्देश,

National Green Tribunal ने सिरमौर में नदियों के पास अवैध निर्माण और मलबा डंपिंग की जांच के आदेश दिए हैं। डीसी को नियमों के उल्लंघन पर दो महीने में सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
NGT Order Sirmour: सिरमौर में अवैध निर्माण और मलबे पर NGT का बड़ा एक्शन! DC को मिले कड़े निर्देश,

NGT Order Sirmour: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में सामने आए कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों के मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। अधिकरण ने जिला प्रशासन को पूरी निष्पक्षता के साथ मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि यदि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर जिम्मेदार पक्षों पर आवश्यक और कठोर कार्रवाई की जाए।

बता दें कि यह पूरा मामला सिरमौर जिले में नदियों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों के अत्यंत निकट खनन निरीक्षण चौकी तथा वजन पुल (वेब्रिज) के कथित अवैध निर्माण से संबंधित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस निर्माण कार्य के दौरान भारी मात्रा में मलबा फेंका गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इन गतिविधियों के कारण स्थानीय पर्यावरण और बहुमूल्य जल स्रोतों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को बड़ा नुकसान होने की आशंका है।

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मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी की पीठ ने माना कि लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति और धरातली सच्चाई जानने के लिए स्थल का निरीक्षण करना अनिवार्य है। इसके बाद अधिकरण ने जिला मजिस्ट्रेट एवं उपायुक्त, सिरमौर को सीधे निर्देश जारी किए। आदेश के अनुसार, उपायुक्त को आवेदक की शिकायत पर गंभीरता से विचार करते हुए संबंधित स्थल का निरीक्षण कराने और सभी संबंधित तथ्यों की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

एनजीटी ने अपने आदेश में सख्त रुख अपनाते हुए समय सीमा भी तय की है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि यदि जांच की प्रक्रिया में पर्यावरणीय नियमों का किसी भी स्तर पर उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित सक्षम अधिकारियों द्वारा दो माह के भीतर उचित सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके अलावा, क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी विधिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराए जाने का भी निर्देश दिया गया है।

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उल्लेखनीय है कि यह महत्वपूर्ण फैसला 31 जुलाई 2026 को एनजीटी की नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ द्वारा पारित किया गया। इस मामले की सुनवाई एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ द्वारा की गई। यह आदेश मूल आवेदन संख्या 231/2026, नाथूराम चौहान बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य एवं अन्य के अंतर्गत जारी किया गया है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के इस सख्त निर्देश को हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नदियों के पास अवैध निर्माण और मलबा डंपिंग जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में यह आदेश निर्णायक साबित हो सकता है। अब पूरी नज़र जिला प्रशासन की जांच प्रक्रिया पर टिकी है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी और सुधारात्मक कार्रवाई तय होगी।

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