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Bahra University - Shimla Hills

डॉ.सुरेन्द्र की दो पुस्तकों “अज्ञेय की रचना धर्मिता” और “अज्ञेय विचार और चिंतन” का किया गया विमोचन

Published on: 8 September 2021
ह्ज्दफ्ज

सोलन।
मनुष्य को एहसास जो कराये कि वह स्वयं निर्माता का प्रतिरूप है, वह शिक्षक है। निर्माण की अपार शक्ति से अवगत कराकर जो प्रकृति के रहस्यों को उजागर कर नित नूतन आविष्कारों से जीवन को जीवंत कर दे, वह शिक्षक है। शिक्षा के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ ही अवस्थित होता हैं एवम् कदापि कोई लघु व्यक्तित्व प्रविष्ट हो भी जाता हैं तो शिक्षा रूपी “पारस” रत्न के स्पर्श से वह भी स्वर्ण समान बहुमूल्य हो जाता हैं। आज जब सम्पूर्ण विश्व नैतिक,सामाजिक, धार्मिक एवम् राजनैतिक मूल्यों को परिभाषित करने हेतु प्रयासरत हैं तब इस काल में शिक्षा और शिक्षक दोनों का महत्व एवम् भूमिका अत्यंत व्यापक हो जाती हैं। यह कहना समीचीन होगा कि समाज जब भी किंकर्तव्य दशा में पंहुचा हैं तो उसे दिशा सदैव एक शिक्षक ने ही दिखाई हैं।

आज राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर डॉ. सुरेन्द्र शर्मा की हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं पर आधारित शोधालेखों से सुसज्जित दो पुस्तकों, ‘अज्ञेय की रचनाधर्मिता’ और ‘अज्ञेय : विचार और चिंतन’, जो हिन्दी साहित्य प्रतिष्ठित कवि, कथाकार, प्रयोगवाद के प्रवर्तक सच्चिदानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के साहित्य पर आधारित है, का सोलन के बसाल में अवस्थित विवेकानन्द पुस्कालय में प्रोफ़ेसर रामनाथ मेहता जी के कर कमलों द्वारा विमोचन किया गया। प्रोफ़ेसर रामनाथ मेहता हिन्दी साहित्य के लेखक ,कवि,आलोचक एवं बहुचर्चित व्यक्त्वि हैं और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सांध्यकालीन अध्ययन केंद्र शिमला से प्रोफ़ेसर हिन्दी विभाग से सेवानिवृत हुए हैं। इस अवसर पर इन पुस्तकों के सम्पादक डॉ. सुरेन्द्र शर्मा, एसजेवीएनएल में भाषा अधिकारी डॉ प्रवीण ठाकुर, डॉ. हिमेन्द्र काशप, डॉ. कमला और डॉ. आशा उपस्थित रहे।

‘अज्ञेय की रचनाधर्मिता’ और ‘अज्ञेय : विचार और चिंतन’ शीर्षक से प्रकाशित इन पुस्तको में देश के विविध राज्यों से संबद्ध विद्वतजनों,साहित्यविदों,आचार्यों एवं प्राध्यापकों के लगभग 40 आलेख, जो अज्ञेय के साहित्य की विविध विधाओं जैसे कविता,कहानी,उपन्यास, नाटक,निंबध,एकांकी,संस्मरण आदि पर आधारित है, पुस्तक में संकलित है। ये पुस्तक मनीष प्रकाशन दिल्ली और विकास प्रकाशन कानपुर से प्रकाशित हुई हैं और Amazon के माध्यम से देश के कोने-कोने में पहुँचकर सही मायने में सृजन के सरोकार को चरितार्थ कर रही है। इस सृजनात्मक उपलब्धि के लिए प्रोफ़ेसर रामनाथ मेहता जी ने सभी साहित्यविदों,विद्वतजनों, रचनाकारों को बधाई दी और अपना आशीर्वाद प्रदान कर उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामनाएं भी प्रदान दी।

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