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कसौली विधानसभा में इस बार भी मुकाबला केवल कांग्रेस-भाजपा में, जानिए किसका पलड़ा भारी

Published on: 9 November 2022
कसौली विधानसभा में इस बार भी मुकाबला केवल कांग्रेस-भाजपा में, जानिए किसका पलड़ा भारी

प्रजासत्ता ब्यूरो।
हिमाचल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक पारा अब चरम पर पहुंच चुका है। प्रदेश में 12 नवंबर को राज्य की 68 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा और 8 दिसंबर को नतीजे आएंगे। हिमाचल में सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी दल कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों ही दलों लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहें हैं। और कई सीटों पर दोनों में मुकाबला कांटे की टक्कर का है। इन्ही में सोलन जिला की कसौली सीट पर भी चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प बने हुए हैं।

इस आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला मौजूदा भाजपा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल और कांग्रेस प्रदेश महासचिव विनोद सुल्तानपुरी के बीच है।दोनों ही उम्मीदवार तीसरी बार आमने- सामने हैं। यहां पिछले दो चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच रोचक मुकाबला रहा है। साल 2017 में भाजपा के राजीव सैजल ने 23,656 वोट हास‍िल कर कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी को स‍ि‍र्फ 442 वोटों के अंतराल से मात दी थी। जबकि इससे पहले साल 2012 का चुनाव भी दोनों के बीच हुआ था ज‍िसमें भाजपा के राजीव सैजल ने 19,960 मत प्राप्‍त कर मात्र 24 वोटों के मार्ज‍िन से कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी को हराया था। दोनों के बीच उस चुनाव में भी कांटे की टक्‍कर रही थी। वर्ष 2017 में तीसरी बार जितने के बाद उन्हें मंत्रीपद मिलेगा इसी आस पर लोगों ने खुले तौर पर उनका समर्थन किया था। जिसके चलते चुनाव में जीत का मार्जन कुछ बढ़ा था।

15 वर्षों से अनुसूच‍ित जात‍ि के ल‍िए आरक्ष‍ित इस सीट पर भाजपा का वर्चस्‍व कायम है, और इस बार भाजपा ने अपने सीट‍िंग एमएलए और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल को ही मैदान में उतारा है। हालांकि टिकट आबंटन से पहले चुनावी चर्चाएं यह हो रही थी की इस बार राजीव सैजल को कसौली की जगह सोलन से उम्मीदवार बनाया जाए। रिवाज बदलने और सत्ता में वापसी के दबाव के चलते और कसौली में भाजपा से कोई अन्य मजबूत प्रत्याशी न होने के चलते मजबूरी में दुबारा राजीव सैजल को ही इस बार प्रत्याशी पड़ा। जहां कसौली से आम आदमी पार्टी से उम्मीदवार हरमेल धीमान भी हैं, जो भाजपा छोड़ कर आप की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनाए गए राजीव कौंडल है। अन्य उम्मीदवार भी आजाद चुनाव मैदान में है।

कसौली विधानसभा में भाजपा जहां चौथी बार जीत हास‍िल करने की कोश‍िश में है। वहीं कांग्रेस सीट पर वापसी करने की जद्दोजहद में जुटी है। लेकिन इस बार कसौली से कांग्रेस का पलड़ा काफ़ी मजबूत नज़र आ रहा है। जहां भाजपा प्रत्याशी,और मौजूदा मंत्री के खिलाफ़ एंटी इनकंबेंसी का फैक्टर है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी के साथ दो बार हार पर लोगों की सहानुभूति भी है। वहीं सीधे तौर पर भाजपा से आप में शामिल हरमेल धीमान और राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के प्रत्याशी भी भाजपा के ही वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी कर रहें है। अन्य आज़ाद प्रत्याशी अगर 500 का आंकड़ा भी छूं ले तो अपने आप में बड़ी बात रहेगी। जबकि आप और राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के प्रत्याशी का आंकड़ा कुल मिलाकर 5 से 7 हजार के बीच रहने वाला है।

वर्तमान हालातों के अनुसार कसौली में मुख्य मुकाबला मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल और कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी में ही है। कसौली में भाजपा के पिछड़े की बड़ी वजह सवर्ण आयोग की मांग करने वाली राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी भी बनेगी। जिससे जुड़े लोग कई बार राजीव सैजल गो बैक के नारे लगा कर उनका विरोध भी कर चुके हैं। सही मायने में देखा जाए तो जितना भी वोट राष्ट्रीय देवभूमि और आम आदमी में जाएगा उससे भाजपा को खुले तौर पर ज्यादा नुकसान होगा, जिससे कसौली में भाजपा की जीत मुश्किल में पड़ती नजर आ रही है। क्योंकि राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी में उन्ही क्षेत्रों से अधिकतर लोग जुड़े हैं जहां भाजपा का गढ़ रहा है, और इन क्षेत्रों में हमेशा कांग्रेस 200 से 250 वोट पिछड़ती रही है। वहीं भाजपा से आप में शामिल हुए, हरमेल धीमान भी भाजपा के ही वोट पर बड़ी सेंधमारी करेंगे। जिसका सीधा फायदा इस बार कांग्रेस को मिलने वाला है। इसके अलावा अगर एजेंसियों के सर्वे को आधार माना जाए तो यह सीट कांग्रेस की झोली में करो नज़र आ रही है।

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