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राजपूत CM, ब्राह्मण डिप्टी सीएम बना कर कांग्रेस ने 2024 के लिए सेट किया कास्ट कॉम्बिनेशन, कैबिनेट के जरिए क्षेत्रीय व जातीय संतुलन बनाने की चुनौती

राजपूत CM, ब्राह्मण डिप्टी सीएम बना कर कांग्रेस ने 2024 के लिए सेट किया कास्ट कॉम्बिनेशन, कैबिनेट के जरिए क्षेत्रीय व जातीय संतुलन बनाने की चुनौती

प्रजासत्ता ब्यूरो।
हिमाचल प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस ने वापसी करते हुए राजपूत समाज से संबंध रखने वाले सुखविंदर सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री तो ब्राह्मण समुदाय से आने वाले मुकेश अग्निहोत्री को डिप्टी सीएम के पद पर बैठा कर सिर्फ हिमाचल में सामाजिक संतुलन बनाने कोशिश ही नहीं की बल्कि 2024 के चुनाव के लिए मजबूत सियासी आधार रखा है।

हालांकि कांग्रेस ने सीएम और डिप्टीसीएम के जरिए जातीय समीकरण को साधने की कवायद की है, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन नहीं बना सकी। ऐसे में अब माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल के जरिए क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश होगी।

बता दें कि हिमाचल में 32 फीसदी के करीब राजपूत वोटर हैं तो 18 फीसदी ब्राह्मण है। इस तरह से प्रदेश में सवर्ण जातियों का वोट 50 फीसदी के करीब है। कांग्रेस ने राजपूत सीएम और ब्राह्मण डिप्टी सीएम बनाकर सवर्ण समुदाय को एक साथ जोड़े रखने का दाव जरूर चला है लेकिन क्षेत्रीय आधार पर संतुलन नही बना पाई। क्योंकि सुखविंदर सिंह सुक्खू हमीरपुर जिला के नादौन से विधायक हैं जबकि मुकेश अग्निहोत्री जिला ऊना के हरोली से विधायक हैं।इस तरह से दोनों ही नेता हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से आते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस नई कैबिनेट के जरिए क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश करेगी तो एससी और एसटी समुदाय को भी तवज्जे दी जा सकती है।

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उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने सुक्खू के जरिए ठाकुर समुदाय को साधने की कोशिश की है तो मुकेश अग्निहोत्री के जरिए ब्राह्मणों को भी साधने का दांव जरूर चला है। लेकिन ओबीसी और अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग को भी साधने की चुनौती होगी। क्योंकि अनुभवी नेताओं के साथ युवाओं को भी मंत्रिमंडल में तरजीह देनी होगी। ऐसे में कांग्रेस को नए मंत्रिमंडल के गठन के लिए ओबीसी,और अनुसूचित जाति व जनजाति के अलावा क्षेत्रीय संतुलन बनाने में भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के हारने के चलते अब नए नेताओं की लॉटरी लगने के आसार बन गए हैं।

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