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हिमाचल में फिर लौटा ओल्ड पेंशन विवाद! नड्डा, सुक्खू और जयराम के बयानों से गरमाई राजनीति

Himachal Pradesh OPS Update: हिमाचल प्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बयान के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा पर कड़ा निशाना साधा है।
Old Pension Scheme News: हिमाचल में फिर लौटा ओल्ड पेंशन विवाद! नड्डा, सुक्खू और जयराम के बयानों से गरमाई राजनीति

Old Pension Scheme News: हिमाचल प्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर सियासत एक बार फिर पूरी तरह से गरमा चुकी है। ओपीएस के मुद्दे पर राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार और विपक्षी दल भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस पूरे विवाद की ताजा वजह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का हालिया हिमाचल दौरा बना है।

शिमला में मीडिया द्वारा ओपीएस को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि भाजपा का स्टैंड आज भी बिल्कुल वही है जो साल 2022 के विधानसभा चुनाव के समय था। उन्होंने कहा कि पार्टी न्यू पॉलिसी स्कीम (UPS) की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्रीय मंत्री के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

मुख्यमंत्री ने जेपी नड्डा के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि का हवाला दिया। सीएम सुक्खू ने कहा कि उनके पिताजी खुद एक सरकारी कर्मचारी थे, जिसके कारण उन्होंने उनके जीवन के संघर्ष, जिम्मेदारियों और परिवार के लिए किए गए त्याग को बहुत करीब से देखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह अच्छी तरह समझते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मान और आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा किसी भी कर्मचारी की सबसे बड़ी पूंजी होती है।

मुख्यमंत्री ने भाजपा की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि इसी सोच के साथ उनकी सरकार ने प्रदेश में ओपीएस को बहाल किया था। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि भाजपा ओपीएस को बंद करके यूपीएस (यूनिफाइड पेंशन स्कीम) लाना चाहती है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी सरकार कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों के साथ किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं होने देगी।

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बता दें कि इस बयानबाजी के बाद साल 2022 के विधानसभा चुनाव की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं, जब ओपीएस का मुद्दा सत्ता परिवर्तन का एक बड़ा कारण बना था। साल 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने एक बयान दिया था, जिसे भाजपा की करारी हार की मुख्य वजहों में से एक माना जाता है।

कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन बहाली की मांग पर जयराम ठाकुर ने कहा था कि अगर पेंशन चाहिए तो खुद चुनाव लड़ो। इसके विपरीत, कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्ता में आते ही ओपीएस लागू करने का वादा किया था, जिसने पार्टी को प्रचंड जीत दिलाने और सत्ता में लाने में बेहद अहम भूमिका निभाई थी।

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दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया से बातचीत में राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है। जयराम ठाकुर का कहना है कि ओपीएस का असली प्रभाव साल 2027 के बाद दिखाई देगा, क्योंकि अभी यह बहुत ही प्रारंभिक चरण में है और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की शुरुआत वर्ष 2027 के बाद बड़े पैमाने पर होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वर्ष 2027 के बाद राज्य के लिए स्थिति बेहद चिंताजनक होगी, जब सरकार के पास विकास कार्यों के लिए बजट नहीं बचेगा और नई पीढ़ी के लिए नौकरियों की संभावनाएं बेहद सीमित हो जाएंगी।

जयराम ठाकुर ने अपनी पिछली सरकार का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने न तो पहले ओपीएस का विरोध किया था और न ही आज कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन भाजपा सरकार कर्मचारियों से केवल थोड़ा इंतजार करने और एक बेहतर रास्ता निकालने की बात कह रही थी। उन्होंने इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाया था, जिसके बाद केंद्र सरकार में यह सारा प्रोसेस यूपीएस के रूप में सामने आया और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखकर चीजें आगे बढ़ रही थीं।

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गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रदेश के करीब 1.36 लाख कर्मचारी ओपीएस लागू होने की उम्मीद लगाए बैठे थे। एनपीएस से ओपीएस के दायरे में आने के लिए कर्मचारी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। कर्मचारियों के इस भरोसे को कायम रखते हुए सीएम सुक्खू ने सरकार की पहली ही कैबिनेट बैठक में ओपीएस लागू करने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद 4 मई को बाकायदा सरकारी अधिसूचना भी जारी की गई, जिसके तहत हिमाचल प्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम को 15 मई 2003 से लागू माना गया।

इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए 15 मई 2003 से लेकर 31 मार्च 2023 तक सेवामुक्त हो चुके एनपीएस कर्मचारियों के लिए ‘हिमाचल प्रदेश सिविल सर्विसिज कंट्रीब्यूटरी पेंशन रूल्स-2006’ में आवश्यक संशोधन किया गया। इस ऐतिहासिक संशोधन के माध्यम से एनपीएस के तहत रिटायर हो चुके कर्मचारियों और जिन कर्मचारियों का सेवाकाल के दौरान निधन हो गया है, उनके परिवारों को भी कुछ तय शर्तों के साथ ओपीएस का लाभ देने का वैधानिक प्रावधान किया गया है। वर्तमान में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बढ़ा टकराव हिमाचल की भावी राजनीति की दिशा तय करने का संकेत दे रहा है।

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