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आखिर कोरोना को लेकर सरकार के दोहरे मापदंड क्यों ?

Published on: 23 April 2021
आखिर कोरोना को लेकर सरकार के दोहरे मापदंड क्यों ?

अमित ठाकुर (परवाणू)
आज करोना की दूसरी भयानक लहर से पूरा देश इसकी चपेट में आ गया है इस कारण आम जनता नें प्रदेश सरकार एवं सरकारी पदाधिकारियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए है ! आज सोलन जिला दण्डाधिकारी सोलन के.सी. चमन ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों के दृष्टिगत जनहित में आवश्यक आदेश जारी किए ।

इन आदेशों के अनुसार जिला में शनिवार एवं रविवार को सभी दुकाने बन्द रहेंगी। यह आदेश फल, सब्जी, दूध एवं दूध से बने उत्पाद, अन्य आवश्यक वस्तुओं की दुकानों तथा दवा की दुकानों पर लागू नहीं होंगे। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि सप्ताह के अन्य दिनों में सभी दुकानें प्रातः 09.00 बजे से सांय 07.00 बजे तक ही खुली रहेंगी। दवा की दुकानें पूर्व की भान्ति खुली रह सकेंगी।

यदि कोई दुकान निर्धारित समयावधि से अधिक समय तक खुली पाई गई तो दुकान मालिक के विरूद्ध हिमाचल प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक संस्थान अधिनियम, 1969 के अनुसार कार्रवाही की जाएगी।

जिला सोलन उपायुक्त के सी चमन द्वारा अभी हाल ही में नये नियम लागू किए गये इन नियमों को लेकर आम जनता नें प्रशाशन की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है ! जनता का कहना है की क्या करोना महामारी केवल सरकार और सरकारी पदाधिकारियों को ही अपनी चपेट में लेगी, क्या इस बीमारी में आम जनता या प्राइवेट कर्मचारी को किसी भी प्रकार की कोई हानि नहीं पहुंचेगी ! आखिर ये दोहरा मापदंड क्यूं अपनाया जा रहा है क्या प्राइवेट नौकरी करने वाला व्यक्ति इस देश का नागरिक नहीं है क्या उसकी सुरक्षा सरकार के लिए आवश्यक नहीं है ! जब भी नियम बनता है तो प्राइवेट कर्मचारी के हितों को अनदेखा किया जाता रहा है चाहे वह पिछ्ले वर्ष लगाया गया पहला लोकडाउन ही क्यूं ना हो ! उस समय पर भी आम जनता और प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारियों के हितों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था उस समय किसी भी प्राइवेट नौकरी वालों को किसी भी प्रकार का वेतन नहीं दिया गया अथवा जब कंपनियां दोबारा खुली तो कई महीनों तक प्राइवेट कर्मचारियों को किसी कंपनी द्वारा 50% तो किसी कंपनी द्वारा 70% ही वेतन दिया गया !

आज जब करोना संक्रमण की परीस्थीतियां पहले से ज़्यादा भयानक हो गयी है उस पर प्रदेश सरकार को प्राइवेट नौकरी करने वालों के हितों एवं उनके आर्थिक स्थिति के बारे में भी सोचना पड़ेगा !
आज प्राइवेट कर्मचारियों के मूलभूत हितों को लेकर कठोर नियम बनानें पड़ेंगे यदि ऐसा नहीं होता है तो सरकार और प्रशाशन को भविष्य में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है !

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