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ऑक्सीजन न मिलने से हुई मौतों की जांच के लिए “नागरिक आयोग” का गठन कर सच्चाई करें उजागर :- राजेश धर्माणी

Published on: 23 July 2021
राजेश धर्मानी

सुभाष कुमार गौतम/घुमारवीं/बिलासपुर
केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में यह बताकर देशवासियों के जख्मों को कुरेदने का काम किया है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई। दूसरी लहर के दौरान लगातार मीडिया में खबरें प्रसारित होती रही कि देश के हर कोने में ऑक्सीजन की कमी से मौतें हो रही हैं और सरकार ने समय रहते कोई उचित कदम नहीं उठाए। पी एम केयर से खरीदे गए ज्यादातर वेंटिलेटर प्रयोग में ही नहीं लाए गए।

हिमाचल प्रदेश में भी कई जगहों पर ऑक्सीजन उपलब्ध न होने की वजह से मौतों की खबरें लगातार मीडिया में आती रही खासकर नेरचौक मेडिकल कालेज से। ऑक्सीजन की कमी का सबसे बड़ा प्रमाण तो नेरचौक मेडिकल कालेज के अनीस्थिया विभाग के एच ओ डी डॉ. जीवानंद चौहान द्वारा मीडिया में दिए एक इंटरव्यू से मिलता है।

रिटायर्ड न्यायधीश व प्रशासनिक अफसरों, पत्रकारों व अन्य बुद्धिजीवियों को आगे आकर ऑक्सीजन से हुई मौतों की सच्चाई जनता के सामने लाने के लिए “नागरिक आयोग” का गठन कर जांच करनी चाहिए।

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