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पत्थर की मूर्तियों में जान डाल देते हैं नराता राम

पत्थर की मूर्तियों में जान डाल देते हैं नराता राम

जी.एल. कश्यप
जिला के धर्मपुर विकास खण्ड की नव गठित पँचायत केन्डोल के 56 वर्षीय नराता राम को पत्थर की मूर्तियां बनाने में महारथ हासिल है । मूर्तिकार नराता राम विभिन जगहों से पत्थर अपने घर पहुंचा कर सड़क के किनारे पिछले 30 वर्षों से पत्थरों को तराश कर मूर्तियां बनाने का कार्य रहे है । मूर्तियां बनाने का इनमें इस कदर जनून है कि गर्मी व सर्दी में भी खुले आसमान के नीचे इनके हाथ नही थमते । अपने पिता से पत्थर को तराशने का हुनर सीखने के बाद इस पुश्तैनी कला को अपनी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के मकसद से वे अपने बेटे,भाई व अन्य गाँव के लोगों को भी इस कला के हुनर सीखा रहे हैं।

मूर्तिकार नराता राम का यह शौक व कला इतनी अदभुत है कि पत्थरों को तराश कर वह जो आकृति उन पर उभारते है वो जीवित सी नजर आती है व इस कला से वे सबको दंग कर रहे हैं । इसी का नतीजा है कि मूर्तिकार नराता राम वर्तमान में मुख्यमंत्री ग्राम शिल्पकार कौशल योजना के तहत क्षेत्र के इच्छुक लोगों को भी इस कला को सीखने का प्रशिक्षण दे रहे है । छह महीनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में क्षेत्र के छह लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है । लेकिन इनका कहना है कि वास्तव में मूर्तिकला के प्रशिक्षण के लिए कम से कम एक वर्ष का समय लाजमी है । प्रशिक्षण में औजारों की जानकारी,पत्थर की पहचान व कटिंग के गुर व आकृतियों में रंग भरना प्रमुख है । विभाग द्वारा प्रशिक्षक व प्रशिक्षु दोनों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है।

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मूर्तिकार नराता राम का कहना है कि मूर्तियां व अन्य आकृतियों को बनाने के लिए नीला ,सफेद व काला पत्थर उपयुक्त होता है । हथोड़े व अन्य औजारों की सहायता से इन पत्थरों को तोड़ कर आकृति के अनुसार तराशा जाता है । साधारणतय दो से तीन फुट ऊंची मूर्ति बनाने में 15 से 20 दिन का समय लग जाता है । इन मूर्तियों को बेच कर वे अपना जीवन यापन कर रहे है । वर्तमान में जिला शिमला,सोलन,बिलासपुर के इलावा स्थानीय लोग भी इनके हाथ से बनी मूर्तियों के मुरीद है । पहाड़ों में रहने वाले लोग इनसे अपने कूल देवताओं की मूर्तियां आर्डर पर बनवाते है ।

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सैंकड़ों मंदिरों में इनके हाथ से बनी मूर्तियों की पूजा होती है । वहीं मान्यता के अनुसार हाथ द्वारा पत्थर से बनी देवी देवताओं की मूर्तियों में ही प्राण प्रतिष्ठा डलती है क्योंकि इन मूर्तियों में किसी भी अन्य धातु के अंश नही होते । नराता राम का कहना है कि यह उनका पुश्तैनी काम है । इसे वह खुद तक सीमित नही रखना चाहते । इनका मानना है कि यदि युवा वर्ग इस कला को सिख ले तो देश विदेश में अपनी कला से नाम कमा सकता है लेकिन युवा पीढ़ी में इस काम के प्रति ज्यादा उत्साह नही है ।

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देवी देवताओं की कर रहे मूर्तियां तैयार :
मूर्तिकार नराता राम बजरंग बली,शिव परिवार, काली व दुर्गा माता,पांच पीर,नन्दी बैल,शिवलिंग के इलावा शील बट्टे, कुंडी,चवाँसी,चक्की व अन्य आर्डर पर कई तरह की पारंपरिक मूर्तियां बना रहे है ।

फोटो: कैंडोल के मूर्तिकार नराता राम

Kasauli International Public School, Sanwara (Shimla Hills)
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