Karnataka High Court: बेंगलुरु के दक्षिणी इलाके में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण मामले में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को कर्नाटक हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनके खिलाफ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले में दर्ज FIR की जांच रोकने या कोई अंतरिम सुरक्षा देने से साफ इनकार कर दिया।
बता दें कि 8 जनवरी को जस्टिस एम नागप्रसन्ना की बेंच ने यह फैसला सुनाया। श्री श्री ने FIR रद्द करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि अभी जांच रोकना सही नहीं, इससे डिवीजन बेंच के पुराने आदेश का उल्लंघन होगा। बिना पूरा रिकॉर्ड देखे कोई सुरक्षा नहीं दी जा सकती। अगर जांच में नोटिस मिले, तो बाद में कोर्ट आ सकते हैं।
डिवीजन बेंच ने साफ कहा था कि सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। बिना रिकॉर्ड देखे अभी कोई सुरक्षा/संरक्षण देने का आदेश पास करना उचित नहीं। अगर भविष्य में याचिकाकर्ता को जांच के लिए कोई नोटिस मिलता है, तो वो उस वक्त दोबारा कोर्ट आ सकता है।”
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, एक जनहित याचिका (PIL) में श्री श्री को पक्षकार बनाया गया था। बाद में उन पर कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम 1964 की धारा 192A के तहत केस दर्ज हुआ। जिसमें सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे पर जेल और जुर्माना हो सकता है। FIR बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन टास्क फोर्स ने दर्ज की।
PIL में आरोप है कि बेंगलुरु साउथ के कग्गलिपुरा गांव में राजकलवे (तूफानी पानी की नाली) पर निर्माण हुआ, जिससे झीलों का प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो रहा है। इस पर डिवीजन बेंच ने PIL निपटाते हुए अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने और कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
कोर्ट ने प्रॉसिक्यूटर को सारे रिकॉर्ड अगली तारीख पर लाने को कहा। अब सुनवाई 12 जनवरी को होगी। बता दें कि PIL में बेंगलुरु के दक्षिणी इलाके में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया था। दावा किया गया कि बेंगलुरु साउथ तालुक के कग्गलिपुरा गांव में एक राजकलवे (झीलों को जोड़ने वाली तूफानी पानी की नाली) पर निर्माण किया गया है। जिससे प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है।












