Himachal News Today: केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को पूरी तरह बंद करने के फैसले ने हिमाचल प्रदेश में हलचल मचा दी है। राज्य की आर्थिक स्थिति पर इसका गहरा असर पड़ रहा है और साथ ही राजनीतिक माहौल भी गरमाया हुआ है। वित्त विभाग ने शिमला में इस फैसले के प्रभावों को लेकर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। इस बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित सरकार के मंत्री, कई विधायक और मीडिया के प्रतिनिधि मौजूद थे।
प्रस्तुति में जहाँ आरडीजी बंद होने से राज्य की कमाई पर पड़ने वाले असर और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा हुई। इस बीच विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया। भाजपा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला। खास कर नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रविवार को देहरा में प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर कड़ी आलोचना की।
भाजपा के कर्मचारी प्रकोष्ठ के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को शायद यह एहसास ही नहीं है कि वह प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। उनके कामकाज से ऐसा लगता है जैसे वह आज भी किसी छात्र संगठन का संचालन कर रहे हों।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश इस समय गंभीर वित्तीय संकट की ओर बढ़ चुका है और हालात ऐसे बन गए हैं कि प्रदेश में वित्तीय आपात जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री के उन बयानों पर भी सवाल उठाए, जिनमें कहा गया है कि प्रदेश 2027 तक अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा और 2032 तक सबसे समृद्ध राज्य बनेगा। जयराम ने कहा कि जनता जानना चाहती है कि मुख्यमंत्री यह दावा किस आधार पर कर रहे हैं।
उन्होंने वित्त आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के सरकार के फैसले को भी गलत बताया। जयराम ने कहा कि वित्त आयोग कोई सरकार के अधीन संस्था नहीं है, बल्कि एक स्वायत्त और संवैधानिक संस्था है, जिसके हर फैसले की अपनी प्रक्रिया होती है। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री प्रदेश की बात सही तरीके से आगे नहीं रख पाए।
बिजली बोर्ड के निजीकरण से जुड़ी प्रेजेंटेशन के सवाल पर जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्हें इस बारे में केवल एक पत्र के जरिए जानकारी दी गई थी, जो वित्त सचिव की ओर से भेजा गया था। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री को वास्तव में लगता था कि प्रदेश संकट में है, तो वह स्वयं उनसे बात करते या सीधे पत्र लिखते।
जयराम ठाकुर ने कहा कि वह किसी सचिव की चिट्ठी के आधार पर निर्णय लेने वालों में से नहीं हैं और प्रदेश हित को वह मुख्यमंत्री से बेहतर समझते हैं। उन्होंने व्यवस्था परिवर्तन का नारा देने वाली सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इस सरकार ने व्यवस्था को पूरी तरह तार-तार कर दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार खुद स्पष्ट कर चुकी है कि अब न कर्मचारियों को डीए मिलेगा, न एरियर और न ही सब्सिडी दी जाएगी। जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि वित्त सचिव यह स्वीकार कर चुके हैं कि इन सब कटौतियों के बावजूद भी प्रदेश के बजट में 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अंतर बना रहेगा।















