Trump Pharmaceutical Tariffs: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक फार्मास्युटिकल बाजार को प्रभावित करने वाला एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अमेरिका में आयात होने वाली विदेशी पेटेंट और ब्रांडेड दवाओं पर 100% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का ऐलान किया गया है।
प्रशासन के इस कदम का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिका में दवाओं की अत्यधिक कीमतों पर लगाम लगाना और घरेलू उत्पादन (Onshoring) को प्रोत्साहित करना है। दवा कंपनियों को 120 दिनों का अल्टीमेटम राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित इस नई नीति को लागू करने के लिए सख्त समय-सीमा तय की गई है। बड़ी दवा कंपनियों को इस टैरिफ से बचने की कार्ययोजना पेश करने के लिए 120 दिनों की समय-सीमा (डेडलाइन) दी गई है।
वहीं, लघु एवं मध्यम स्तर की कंपनियों को थोड़ी राहत देते हुए 180 दिनों की मोहलत प्रदान की गई है। इस अवधि के भीतर कंपनियों को यह स्पष्ट करना होगा कि वे या तो अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट अमेरिका में स्थानांतरित करेंगी या फिर सरकार के साथ विशेष समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगी।
प्राइसिंग एग्रीमेंट और MFN फॉर्मूला ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ से बचने के लिए ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (MFN) प्राइसिंग फॉर्मूला भी पेश किया है। इस नीति के तहत, यदि विदेशी कंपनियां अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के साथ समझौता करती हैं, तो उन्हें अमेरिका में दवाओं की कीमतें अन्य विकसित देशों के औसत मूल्य के बराबर लानी होंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 17 प्रमुख वैश्विक कंपनियां इस संदर्भ में सरकार के साथ चर्चा कर रही हैं, जिनमें से 13 कंपनियों के साथ शुरुआती समझौते (Deal) फाइनल हो चुके हैं। अमेरिका में उत्पादन पर टैक्स में भारी छूट सरकार ने उन कंपनियों के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की है जो अपनी उत्पादन इकाइयों को अमेरिका में स्थानांतरित करने का दावा करती हैं। ऐसी कंपनियों को 100% टैरिफ के बजाय केवल 20% टैक्स देना होगा।
यह कदम सीधे तौर पर उन पेटेंट दवाओं को लक्षित करता है जो विदेशों में निर्मित होकर अमेरिकी बाजार में ऊंचे दामों पर बेची जाती हैं। विशेष रूप से, यह नीति जेनेरिक दवाओं पर लागू नहीं होगी, जो अमेरिकी बाजार की कुल मांग का लगभग 90% हिस्सा कवर करती हैं।
ग्लोबल फार्मा सप्लाई चेन पर प्रभाव वरिष्ठ विश्लेषकों का मानना है कि इस आदेश के बाद यूरोपीय और एशियाई देशों की दिग्गज फार्मा कंपनियों के लिए अमेरिका में कारोबार करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। ट्रंप प्रशासन के इस ‘कैरट एंड स्टिक’ (पुरस्कार और दंड) मॉडल ने वैश्विक सप्लाई चेन को फिर से परिभाषित करने के संकेत दिए हैं। यदि कंपनियां अमेरिकी शर्तों को नहीं मानती हैं, तो उनके उत्पादों की कीमतें अमेरिकी बाजार में दोगुनी हो सकती हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर गंभीर असर पड़ेगा।




















