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Himachal Construction Cost Hike: हिमाचल में आशियाना बनाना हुआ दूभर, ईंट और सरिये के बाद अब सीमेंट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

Himachal Construction Crisis: हिमाचल प्रदेश में सीमेंट के दामों में ₹15 प्रति बैग की वृद्धि और सरिये की कीमतों में ₹1,000 प्रति क्विंटल के उछाल से घर बनाना अब और महंगा हो गया है। ईंटों के बढ़ते दाम पहले ही आम जनता की कमर तोड़ चुके थे।
Himachal Construction Cost Hike: हिमाचल में आशियाना बनाना हुआ दूभर, ईंट और सरिये के बाद अब सीमेंट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
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Himachal Construction Cost Hike: हिमाचल प्रदेश में अपना घर बनाने का सपना देख रहे आम आदमी की जेब पर अब महंगाई की दोहरी मार पड़ी है। पहले ईंटों के दाम बढ़े और अब प्रदेश में सीमेंट और सरिये की कीमतों में भी भारी उछाल आ गया है। सीमेंट कंपनियों ने प्रति बैग 15 रुपये की सीधी बढ़ोतरी कर दी है, जबकि बीते महज 20 दिनों के भीतर सरिये के दाम 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक चढ़ गए हैं।

बता दें कि सोमवार से लागू हुई सीमेंट की इन नई दरों ने निर्माण कार्य की लागत को अचानक बढ़ा दिया है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए घर की नींव रखना अब और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस ताजा बढ़ोतरी से पहले ही प्रदेश के लोग ईंट की कीमतों में हुई 2 से 3 रुपये की वृद्धि से परेशान थे, लेकिन अब सीमेंट और लोहे के बढ़ते भावों ने बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है।

बाजार की स्थिति पर नजर डालें तो बिलासपुर से लेकर चंबा तक सीमेंट के अलग-अलग ब्रांड्स के दाम आसमान छू रहे हैं। विक्रेताओं के अनुसार एसीसी सुरक्षा सीमेंट, जो कल तक 395 रुपये में मिलता था, अब 410 रुपये प्रति बैग हो गया है। इसी तरह एसीसी गोल्ड सीमेंट की कीमत 435 रुपये से बढ़कर 450 रुपये और जंग रोधक सीमेंट 380 रुपये से बढ़कर 395 रुपये प्रति बैग तक पहुंच गई है।

अंबुजा सीमेंट की बात करें तो इसकी कीमत भी 400 रुपये से उछलकर 415 रुपये हो गई है। बांगड़ सीमेंट अब 385 के बजाय 400 रुपये में मिल रहा है, वहीं अल्ट्राटेक सीमेंट के दामों में भी वृद्धि दर्ज की गई है और यह अब 390 रुपये से बढ़कर 405 रुपये प्रति बैग के हिसाब से बेचा जा रहा है। चंबा जैसे ऊंचे इलाकों में तो लागत और भी ज्यादा है, जहां अंबुजा प्लस के दाम 465 रुपये और एसीसी सीमेंट के दाम 420 रुपये प्रति बैग तक जा पहुंचे हैं।

सरिये के बाजार में भी स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है। हमीरपुर में जो 12 एमएम का सरिया कुछ समय पहले 6100 रुपये में उपलब्ध था, उसके दाम अब 6500 से 6600 रुपये के बीच झूल रहे हैं। ब्रांडेड कंपनियों की बात करें तो टाटा सरिया अब 6800 रुपये से बढ़कर 7000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।

इसी तरह जिंदल के दाम 6400 से बढ़कर 6600 रुपये और कामधेनु सरिये की कीमत 6500 से बढ़कर 6700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। महज तीन हफ्तों के भीतर सरिये के भाव में आई यह तेजी ठेकेदारों और घर बनाने वालों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि निर्माण सामग्री में सरिया एक बड़ा हिस्सा होता है।

गौरतलब है कि इस महंगाई के पीछे कई वैश्विक और स्थानीय कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों और विक्रेताओं का मानना है कि निर्माण सामग्री के महंगे होने की मुख्य वजह कच्चे माल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि है। इसके अलावा, परिवहन लागत में इजाफा होने से ढुलाई महंगी हो गई है, जिसका सीधा असर अंतिम उत्पाद की कीमत पर पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध और कोयले की कीमतों में वैश्विक स्तर पर आ रही तेजी ने भी सीमेंट उत्पादन की लागत को बढ़ा दिया है। कोयला सीमेंट बनाने की प्रक्रिया में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होता है, इसलिए जब भी इसकी कीमतें बढ़ती हैं, कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। कुल मिलाकर, ईंट, सीमेंट और सरिया तीनों के एक साथ महंगे होने से हिमाचल में अब ‘सपनों का महल’ तैयार करना काफी महंगा सौदा साबित हो रहा है।

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