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Himachal High Court Fake Order Case: हिमाचल हाईकोर्ट के फर्जी आदेश बना धोखाधड़ी की कोशिश, RTI से खुली जालसाजी की पोल

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के नाम पर फर्जी अदालती आदेश तैयार करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसके बाद शिमला पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Himachal High Court Fake Order Case

Himachal High Court Fake Order Case: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में न्यायिक प्रणाली को चुनौती देने वाला एक गंभीर अपराध उजागर हुआ है। जालसाजों ने हिमाचल उच्च न्यायालय के नाम पर न केवल एक फर्जी आदेश तैयार किया, बल्कि उस पर न्यायालय की मुहर और प्रारूप का भी दुरुपयोग करने का प्रयास किया। शिमला पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इन फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से आरोपियों का वास्तविक लक्ष्य क्या था।

आरटीआई आवेदन से हुआ खुलासा
दरअसल, इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश तब हुआ, जब उत्तराखंड के रहने वाले एक व्यक्ति ने ‘सूचना के अधिकार’ (RTI) के तहत उच्च न्यायालय को एक पत्र भेजा। इस पत्र में 15 दिसंबर 2025 को सिविल रिट याचिका संख्या 147/2025 में दिए गए एक कथित निर्णय की सत्यता प्रमाणित करने का अनुरोध किया गया था। जब उच्च न्यायालय प्रशासन ने संबंधित याचिका के रिकॉर्ड की जांच की, तो पाया गया कि वह याचिका पूरी तरह से अलग पक्षकारों के बीच थी और उसका वास्तविक निर्णय 4 जनवरी 2025 को एक भिन्न पीठ द्वारा सुनाया गया था।

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प्रारूप और विवरण में भारी अंतर
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि जालसाजों द्वारा प्रस्तुत किए गए फर्जी आदेश का ‘फॉर्मेट’ उच्च न्यायालय में प्रचलित आधिकारिक प्रारूप से बिल्कुल अलग था। दस्तावेजों में दिए गए विवरण और वास्तविक न्यायिक अभिलेखों में कोई मेल नहीं था। इस गंभीर चूक और फर्जीवाड़े को देखते हुए, रजिस्ट्रार जनरल ने तुरंत शिमला के पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित शिकायत सौंपी।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस जांच
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (2) (धोखाधड़ी), 336 (3) और 336 (4) (जालसाजी), 340 (2) (जाली दस्तावेजों का उपयोग) और 61 (2) (अपराधिक षड्यंत्र) के तहत केस दर्ज किया है।

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एसएसपी शिमला, गौरव सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के फर्जी आदेश तैयार करना एक अत्यंत संवेदनशील मामला है। पुलिस हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है और प्रारंभिक संदेह के आधार पर दो व्यक्तियों की भूमिका को खंगाला जा रहा है।

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