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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता वाशिंगटन में आज से शुर, टैरिफ पर टिकी हैं सभी की निगाहें

India US Bilateral Trade Agreement: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आज से वाशिंगटन में तीन दिवसीय उच्च-स्तरीय वार्ता शुरू हो रही है, जिसमें नए टैरिफ ढांचे को लेकर चर्चा मुख्य केंद्र रहेगी।
Published on: 20 April 2026
India US trade talks US Tariffs on India: भारत पर ट्रंप ने लगाया 25% टैरिफ, 1 अगस्त 2025 से होगा लागू

India US Trade Talks: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण दौर की वार्ता आज, सोमवार 20 अप्रैल, 2026 से वाशिंगटन में शुरू हो रही है। यह वार्ता 22 अप्रैल तक चलेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण को अंतिम रूप देना है।

भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में 12 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस चर्चा में शामिल होगा। इस प्रतिनिधिमंडल में वाणिज्य, सीमा शुल्क और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह अक्टूबर 2025 के बाद पहली बार है जब दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठकर व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं।

नए टैरिफ ढांचे से उत्पन्न चुनौतियां
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को रद्द करने के बाद, वाशिंगटन ने एक नया अस्थायी ढांचा लागू किया है। इसके तहत, 24 फरवरी से अगले 150 दिनों (23 जुलाई तक) के लिए सभी देशों पर समान रूप से 10% का फ्लैट टैरिफ लगाया गया है।

इस नए 10% के वैश्विक टैरिफ ने भारत के लिए पुरानी व्यापारिक बढ़त को चुनौती दी है। पहले की शर्तों के तहत, भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50% से घटकर 18% तक आने की संभावना थी, जिसमें रूसी तेल खरीद से संबंधित 25% की दंडात्मक शुल्क की वापसी भी शामिल थी। अब जब वह लाभ कम हो गया है, तो भारत इन प्रतिबद्धताओं पर फिर से विचार करने के लिए लचीलापन अपना रहा है।

समझौते का पुनर्मूल्यांकन और रणनीति
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि समझौते को ‘पुन: कैलिब्रेट और पुनर्गठित’ किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भारत को नए वैश्विक टैरिफ ढांचे के तहत कोई नुकसान न हो। नई दिल्ली का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों को मिलने वाली लागत प्रतिस्पर्धात्मकता को बहाल करना है।

फरवरी में तय किए गए ढांचे के तहत, भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर शुल्क कम करने, कृषि उत्पादों (जैसे ट्री नट्स, फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट) पर ड्यूटी में कटौती और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने की पेशकश की थी। अब वार्ताकार इन सभी बिंदुओं पर दोबारा विचार करेंगे। साथ ही, भारत द्वारा पांच वर्षों में 500 बिलियन डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान (ऊर्जा, विमान, सेमीकंडक्टर इनपुट और कोकिंग कोल) खरीदने की योजना का भी पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है।

व्यापारिक माहौल और USTR की जांच
वार्ता के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा धारा 301 के तहत शुरू की गई दो जांचें भी बड़ा मुद्दा होंगी। ये जांचें भारत सहित अन्य देशों में कथित ‘अत्यधिक’ विनिर्माण क्षमता को लक्षित करती हैं। भारत ने इन जांचों को अनुचित बताते हुए उनके वापस लेने पर जोर दिया है।

मौजूदा व्यापारिक गतिशीलता पर नजर डालें तो 2025-26 में चीन ने अमेरिका को पछाड़कर भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार का स्थान ले लिया है। इस बीच, अमेरिका को भारत का निर्यात मामूली 0.92% बढ़कर 87.3 बिलियन डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से आयात 15.95% बढ़कर 52.9 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इससे भारत का व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 बिलियन डॉलर रह गया है। यह वार्ता इस बदले हुए वैश्विक व्यापारिक परिवेश में भारत के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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