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भारतीय अर्थव्यवस्था का वैश्विक रैंकिंग में फिसलन, जानिए क्या है 6वें पायदान पर आने की असली वजह.?

IMF Report India GDP: आईएमएफ की नवीनतम रिपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के वर्तमान आकार और भविष्य के लक्ष्यों पर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें देश की जीडीपी रैंकिंग में आई गिरावट ने चिंता और विश्लेषण का दौर शुरू कर दिया है।
Published on: 21 April 2026
Indian Economy GDP Ranking: GDP रैंकिंग में फिसला भारत, छठी पायदान पर पहुंची इकोनॉमी

Indian Economy Ranking 2026 : हाल ही में जारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक रैंकिंग में फिसलकर अब छठे स्थान पर आ गई है। यह स्थिति उन लोगों के लिए चौंकाने वाली है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ते हुए देख रहे थे। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 4.15 ट्रिलियन डॉलर है।

गौर करने वाली बात यह है कि जिन देशों यूके और जापान को भारत ने 2022 और 2025 में पीछे छोड़ दिया था, वे अब फिर से भारत से आगे निकल गए हैं। इस गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारणों में से एक भारतीय रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होना है। रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है और पिछले कुछ समय में इसमें लगभग 9% की गिरावट दर्ज की गई है।

विश्लेषकों के अनुसार इस गिरावट के दो बड़े कारण हैं। पहला, रुपए की डॉलर के मुकाबले 9% की भारी गिरावट। रुपया अभी अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर है और एशिया की प्रमुख मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है। आईएमएफ किसी देश की जीडीपी की गणना पहले स्थानीय मुद्रा में करता है, फिर उसे डॉलर में बदलता है। मुद्रा कमजोर होने से डॉलर में जीडीपी का आंकड़ा अपने आप छोटा हो जाता है।

दूसरा कारण पुराना बेस ईयर था। पिछले कई सालों से भारत सरकार जीडीपी की गणना 2011-12 के बेस ईयर पर कर रही थी, जो अब 14 साल पुराना हो चुका था। फरवरी में सरकार ने बेस ईयर को 2022-23 में बदल दिया। इससे पता चला कि 2023 के बाद के जो जीडीपी आंकड़े दिए जा रहे थे, वे महंगाई के कारण फूले हुए थे। पुराने लेंस से देखने की वजह से वास्तविक तस्वीर बड़ी दिख रही थी।

जापान की स्थिति भी ध्यान देने वाली है। पिछले 4 सालों से उसकी अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है और जीडीपी लगातार घट रही है, फिर भी हम उससे पीछे खिसक गए हैं। प्रति व्यक्ति आय में हम पहले से ही काफी पीछे थे, लेकिन कुल अर्थव्यवस्था के साइज में भी पिछड़ना चिंता का विषय माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आईएमएफ किसी भी देश की जीडीपी की गणना उसकी स्थानीय मुद्रा में करता है और फिर उसे अमेरिकी डॉलर में परिवर्तित करता है। जब स्थानीय मुद्रा की वैल्यू डॉलर के मुकाबले गिरती है, तो डॉलर में जीडीपी का आकार अपने आप छोटा हो जाता है। दूसरे महत्वपूर्ण कारण के तौर पर जीडीपी गणना के ‘बेस ईयर’ (Base Year) में किए गए बदलाव को देखा जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि फरवरी में केंद्र सरकार ने जीडीपी गणना के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया। 14 साल पुराने आधार वर्ष के कारण पहले जो जीडीपी के आंकड़े बताए जा रहे थे, उनमें महंगाई का असर अधिक था, जिससे वे आंकड़े वास्तविकता से काफी बड़े और ‘इन्फ्लेटेड’ (फुले हुए) प्रतीत हो रहे थे। नए आधार वर्ष पर आने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि पुरानी गणना में वास्तविक स्थिति का आकलन कुछ अलग था।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या भारत 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल कर पाएगा? वर्तमान 4.15 ट्रिलियन डॉलर से 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने के लिए भारत को एक साल में करीब 20% की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ की आवश्यकता होगी, जो आर्थिक रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण और व्यावहारिक रूप से असंभव सा प्रतीत होता है। भारत की पिछले 10 वर्षों में औसत जीडीपी विकास दर लगभग 7% रही है।

इतिहास गवाह है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन भी अपने चरम विकास के दिनों में कभी 20% की सालाना नॉमिनल ग्रोथ हासिल नहीं कर सकी हैं। गौरतलब है कि कोविड से पहले सरकार का पहले 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य 2025 था, जिसे बाद में बढ़ाकर 2027 कर दिया गया था। मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए, यह लक्ष्य और आगे खिसकने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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