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लुहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों ने खोला मोर्चा, मुआवजा और रोजगार न मिलने से भड़के लोग

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की लुहरी जल विद्युत परियोजना के खिलाफ स्थानीय किसान लामबंद हो गए हैं। लंबित मांगों और मुआवजे में भेदभाव के विरोध में किसानों ने परियोजना स्थल पर प्रदर्शन कर निर्माण कार्य को पूरी तरह से रोक दिया है।
Luhri Hydro Project Compensation: लुहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों ने खोला मोर्चा, मुआवजा और रोजगार न मिलने से भड़के लोग

Luhri Hydro Project Compensation: हिमाचल किसान सभा और लुहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट प्रभावित कमेटी के आह्वान पर शुक्रवार को सैकड़ों प्रभावित किसानों ने प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन और सतलुज जल विद्युत निगम (SJVN) के विरुद्ध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनके समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने परियोजना स्थल पर जमकर नारेबाजी की और निर्माण गतिविधियों को ठप कर दिया।

हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा कि परियोजना से प्रभावित लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि SJVN के साथ पूर्व में कई बार लिखित समझौते हुए, लेकिन न तो निगम ने और न ही प्रशासन ने उन समझौतों को धरातल पर लागू किया। सिन्हा के अनुसार, वर्ष 2021 से चल रहे इस प्रोजेक्ट के कारण हो रही ब्लास्टिंग और धूल से किसानों की फसलों और मकानों को भारी नुकसान हुआ है, जिसकी क्षतिपूर्ति अभी तक नहीं मिली है।

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लुहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट प्रभावित कमेटी के महासचिव देवकी नंद और अध्यक्ष कृष्णा राणा ने मुआवजे के वितरण में स्पष्ट भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक ही परियोजना के प्रभावित होने के बावजूद विभिन्न गांवों के बीच मुआवजे को लेकर दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है, जो कतई स्वीकार्य नहीं है। किसान सभा ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

मुआवजे और राहत के मामले में कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। देलठ, नीरथ और आनस गांव के किसानों को केवल 2021-22 का ही मुआवजा मिल पाया है। वहीं, शमाथला, भूटी, फाटी देहरा, बायल और गड़ैच गांवों में सर्वे पूरा होने के बावजूद किसानों को भुगतान का इंतजार है। इसके अतिरिक्त, बरकेली के 33 परिवारों को अब तक फसल मुआवजा नहीं मिला है।

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मकानों के नुकसान के मामले में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। निथर, भूटी, कारंगला और बढ़ाच गांव के मकानों में सर्वे के बाद भी प्रभावितों को अब तक कोई मुआवजा राशि नहीं दी गई है। साथ ही, अपनी उपजाऊ भूमि परियोजना को देने वाले 120 परिवारों को रोजगार के बदले मिलने वाली एकमुश्त राशि (Lump sum amount) का भी कोई अता-पता नहीं है।

किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया। मौके पर पहुंची टीम ने किसान सभा, एसजेवीएन प्रबंधन और एसडीएम (रामपुर व निरमंड) के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की। इस बैठक में प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि बरकेली के छूटे हुए परिवारों को जल्द मुआवजा जारी किया जाएगा। साथ ही, सर्वे हो चुके अन्य क्षेत्रों में भी भुगतान प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की बात कही गई है।

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प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि रोजगार के बदले दी जाने वाली एकमुश्त राशि के मामले को जून माह में प्रस्तावित आरएंडआर (पुनर्वास और पुनर्व्यवस्था) की बैठक में प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा। फिलहाल, प्रशासन के आश्वासन के बाद किसान किस हद तक संतुष्ट होते हैं और आने वाले समय में परियोजना का काम सुचारू रूप से चलता है या नहीं, यह देखना बाकी है।

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