HP Outsourced Employees Policy: हिमाचल प्रदेश में विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत प्रस्ताव और रिपोर्ट तलब की है। सरकार के इस कदम को उन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जो पिछले कई वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे।
इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत उस समय हुई जब ‘हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड आउटसोर्स कर्मचारी संघ’ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। संघ ने एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर आउटसोर्स कर्मचारियों की दयनीय स्थिति और उनकी जायज मांगों को प्रमुखता से मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की व्यथा सुनने के बाद तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया और मामले को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
कर्मचारी संघ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी तैनात हैं जो पिछले 15 से 20 वर्षों से निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इतने लंबे अनुभव और सेवा काल के बावजूद, इन कर्मचारियों को आज भी मात्र 10 से 12 हजार रुपये प्रति माह के अल्प वेतन पर गुजर-बसर करना पड़ रहा है। वर्तमान महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना इन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
यूनियन ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि आउटसोर्स कर्मचारी न केवल कम वेतन पर काम कर रहे हैं, बल्कि कई विभागों में वे अत्यंत जोखिम भरे कार्यों में भी संलग्न हैं। बिजली बोर्ड जैसे विभागों में काम के दौरान कई कर्मचारियों ने अपनी जान तक गंवाई है। आंकड़ों के अनुसार, ड्यूटी के दौरान हुई दुर्घटनाओं में कई कर्मचारी पूर्ण रूप से दिव्यांग हो चुके हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि इन कर्मचारियों के पास भविष्य की कोई सुरक्षा नहीं है और न ही उनके परिवारों के लिए कोई आर्थिक सहारा उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मुद्दे पर त्वरित संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव ने इस पूरे प्रकरण और कर्मचारी संघ के ज्ञापन को आगामी कार्रवाई के लिए सचिव (कार्मिक) को प्रेषित कर दिया है। शासन स्तर पर इस निर्देश के मिलते ही कार्मिक विभाग ने नीति निर्माण को लेकर अपनी प्रारंभिक कसरत और होमवर्क शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि सरकार अब एक ऐसी रूपरेखा तैयार कर रही है जो इन कर्मचारियों को कानूनी और प्रशासनिक सुरक्षा प्रदान कर सके।
विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब विभिन्न सरकारी विभागों से आउटसोर्स कर्मचारियों का विस्तृत डाटा जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसमें कर्मचारियों की कुल संख्या, उनकी वर्तमान सेवा शर्तें, और उन्हें दिए जा रहे वेतन का पूरा ब्यौरा शामिल होगा। इस डाटा के विश्लेषण के बाद ही कार्मिक विभाग एक व्यापक नीति का मसौदा तैयार करेगा, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
कर्मचारी संघ ने सरकार के सामने जो प्रमुख मांगें रखी हैं, उनमें सबसे महत्वपूर्ण ‘नौकरी की सुरक्षा’ सुनिश्चित करना है। इसके अलावा, कर्मचारियों ने मांग की है कि उन्हें सम्मानजनक न्यूनतम वेतन दिया जाए जो उनकी मेहनत और सेवा के अनुरूप हो। संघ ने यह भी पुरजोर मांग की है कि यदि सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रित परिजनों को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने का प्रावधान नीति में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
बिजली बोर्ड संघ के संयोजक अश्विनी शर्मा और सह संयोजक सोहनलाल तुलिया ने सरकार के इस रुख पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने साझा बयान में कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की संवेदनशीलता पर पूरा भरोसा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रदेश सरकार वर्षों से शोषित हो रहे इन आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं को गहराई से समझते हुए जल्द ही एक सकारात्मक और ऐतिहासिक निर्णय लेगी, जिससे हजारों परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।
उल्लेखनीय है कि इस प्रशासनिक हलचल ने प्रदेश के उन हजारों युवाओं और अनुभवी कर्मचारियों में नई ऊर्जा भर दी है, जो अब तक अस्थाई व्यवस्था के तहत काम करने को मजबूर थे। अब सभी की निगाहें कार्मिक विभाग द्वारा तैयार किए जाने वाले आगामी प्रस्ताव और कैबिनेट के फैसले पर टिकी हैं।
















