Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

Himachal Agriculture: हिमाचल में किसानों को अब मक्की के बीज पर नहीं मिलेगी सब्सिडी, बीज महंगा होने से जेब पर पड़ेगा असर..!

Agriculture News: हिमाचल प्रदेश में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों के लिए बुरी खबर आई है। प्रदेश सरकार ने मक्की के बीज पर मिलने वाली सब्सिडी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है, जिससे अब किसानों को बीज के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी।
Published on: 7 May 2026
Himachal Agriculture: हिमाचल में किसानों को अब मक्की के बीज पर नहीं मिलेगी सब्सिडी, महंगा हो गया बीज

Himachal Agriculture News: हिमाचल प्रदेश में मई महीने की शुरुआत के साथ ही मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश ने जहां खेतों में रौनक लौटा दी है, वहीं किसान अब खरीफ सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल मक्की की बुआई की तैयारियों में जोर-शोर से जुट गए हैं। हालांकि, इस उत्साह के बीच प्रदेश के हजारों किसानों को सरकार के एक फैसले से तगड़ा झटका लगा है।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस बार मक्की के बीज पर दी जाने वाली सब्सिडी को बंद करने का निर्णय लिया है, जिसका सीधा असर अब किसानों की जेब और खेती की लागत पर पड़ना तय है। बता दें कि मक्की हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की प्रमुख फसलों में से एक मानी जाती है। यद्यपि, प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की एक बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए मक्की की खेती पर निर्भर है।

ऐसे में कृषि विभाग के विक्रय केंद्रों पर मिलने वाले बीज की कीमतों में हुआ इजाफा किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। क्योंकि इस साल किसानों को बीज के लिए पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक राशि का भुगतान करना होगा।

प्रदेश सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस बार मक्की के बीज की कीमतों में स्पष्ट बढ़ोत्तरी की गई है। कृषि विभाग ने मक्की के ‘सिंगल क्रॉस’ बीज की कीमत 125 रुपये प्रति किलो निर्धारित की है। वहीं, ‘डबल क्रॉस’ बीज का रेट 100 रुपये प्रति किलो तय किया गया है। अगर पिछले साल के आंकड़ों से इसकी तुलना की जाए, तो पिछले वर्ष सिंगल क्रॉस बीज 118 रुपये प्रति किलो और डबल क्रॉस बीज 95 रुपये प्रति किलो की दर से मिलता था।

सबसे बड़ी मार सब्सिडी खत्म होने से पड़ी है। पिछले साल तक किसानों को प्रति किलो बीज पर 20 रुपये की सरकारी सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती थी। इस बार इस वित्तीय सहायता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। कृषि विभाग के अनुसार, किसानों को मक्की का बीज पांच किलो की पैकिंग में उपलब्ध करवाया जाएगा। इस व्यवस्था के कारण एक साधारण किसान को भी अब अपनी पूरी बुआई के लिए बाजार दरों पर ही भुगतान करना होगा, जिससे उत्पादन लागत में भारी वृद्धि की संभावना है।

बारिश ने दी राहत, समय पर बुआई की उम्मीद
उल्लेखनीय है कि एक तरफ जहां कीमतों ने किसानों को परेशान किया है, वहीं दूसरी तरफ इंद्रदेव की मेहरबानी से बुआई के लिए स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मई के पहले सप्ताह में हुई झमाझम बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 मई से 7 मई 2026 के बीच प्रदेश में 19.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 26 फीसदी अधिक है।

विशेष रूप से बिलासपुर में 323 फीसदी, शिमला में 234 फीसदी, सिरमौर में 317 फीसदी और ऊना में 275 फीसदी अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। कांगड़ा और मंडी जिलों में भी सामान्य से काफी अधिक वर्षा हुई है, जिससे इन क्षेत्रों में मक्की की बुआई समय पर शुरू होने की पूरी उम्मीद है। हालांकि, चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे जिलों में बारिश का ग्राफ सामान्य से नीचे रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम इसी तरह साथ देता रहा, तो इस बार मक्की का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ने की संभावना है।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य की लगभग 90 फीसदी जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है और करीब 70 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती से जुड़ी हुई है।

प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का योगदान लगभग 13.62 फीसदी है। राज्य में कुल 9.97 लाख किसान परिवार हैं, जो लगभग 9.44 लाख हेक्टेयर भूमि पर कृषि कार्य करते हैं। इनमें से अधिकांश किसान ‘लघु’ और ‘सीमांत’ श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में बीज और खाद जैसी मूलभूत कृषि सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि इन छोटे किसानों की आर्थिक कमर तोड़ सकती है।

मीडिया रिपोर्टस के मुतबिक कृषि विभाग के निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया ने स्पष्ट किया है कि मक्की के बीज की आपूर्ति के लिए सप्लाई ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं और विभाग किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

बता दें कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में बजट में कई बड़ी घोषणाएं की थी। उसी क्रम में सरकार ने मक्का का न्यूनतम खरीद मूल्य में वृद्धि करते हुए 40 से 50 रुपये किया था। ऐसे में किसानो का रुझान मक्की की खेती करने के लिए बढ़ा था। लेकिन  इस बार सब्सिडी के बिना महंगे बीज खरीदना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

Agriculture NewsHimachal AgricultureHimachal Agriculture NewsHimachal FarmersHimachal News in Hindi

Join WhatsApp

Join Now