Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राजधानी शिमला को देश के हवाई मानचित्र पर प्रमुखता से जोड़ने के मामले में केंद्र सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि शिमला को नियमित हवाई सेवा से जोड़ने के लिए एक विस्तृत और ठोस समयसीमा अदालत के समक्ष पेश की जाए। कोर्ट ने मंत्रालय के वर्तमान रुख को असंतोषजनक पाते हुए सचिव को 10 दिन के भीतर आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय के सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। उन्होंने खंडपीठ को सूचित किया कि शिमला को सरकार की संशोधित उड़ान योजना के दायरे में लाया जा रहा है। सचिव ने आश्वासन दिया कि आगामी 21 मई से शिमला को हवाई सेवा से पूरी तरह जोड़ दिया जाएगा। हालांकि, अदालत ने इस दलील को टालमटोल करने वाला रवैया करार दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई दिखनी चाहिए।

केंद्र सरकार की ओर से पैरवी करते हुए दलील दी गई कि शिमला हवाई अड्डे की भौगोलिक स्थिति के कारण वहां बड़े विमानों को उतारना जोखिम भरा हो सकता है। सरकार के अनुसार, जिस ‘अलायंस एअर’ कंपनी को हवाई सेवा उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा गया है, उसके बेड़े में वर्तमान में केवल दो छोटे विमान उपलब्ध हैं। कोर्ट ने इस तर्क को सुनने के बाद संबंधित विमानन कंपनी को भी मामले में प्रतिवादी बनाया है और उसे नोटिस जारी कर अपना पक्ष अदालत के सामने रखने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि मामले की सुनवाई में हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि देशभर के राज्यों की राजधानियों को हवाई संपर्क से जोड़ा जा चुका है, लेकिन शिमला जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र और राजधानी को इस सुविधा से वंचित रखना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है। खंडपीठ ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिमला के साथ इस तरह का “सौतेला व्यवहार” बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब इस महत्वपूर्ण मामले पर अगली सुनवाई 14 मई को निर्धारित की गई है।
राज्य के सरकारी अस्पतालों की बदहाल लिफ्टों पर सरकार की खिंचाई,जवाब तलब
वहीं, एक अन्य गंभीर मामले में हाई कोर्ट ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था पर भी कड़ा संज्ञान लिया है। बहुमंजिला अस्पतालों में खराब पड़ी लिफ्टों के कारण मरीजों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को हो रही भारी असुविधा पर कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को फटकार लगाई। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी बहुमंजिला सरकारी अस्पतालों की सूची और वहां उपलब्ध लिफ्टों की वर्तमान स्थिति पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए।
अदालत में पेश किए गए आधिकारिक हलफनामे से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 118 बहुमंजिला अस्पतालों में कुल 56 लिफ्ट स्थापित हैं, जिनमें से केवल 43 ही चालू हालत में हैं। शेष 13 लिफ्ट तकनीकी खराबी या रखरखाव के अभाव में बंद पड़ी हैं। खंडपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पतालों में मरीजों के लिए लगाई गई सुविधाओं का बेकार पड़े रहना चिंताजनक है। सरकार को 30 जून तक सभी खराब लिफ्टों को क्रियाशील बनाने के आदेश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि अदालत ने उन शिकायतों पर भी गौर किया जिनमें कहा गया है कि जो लिफ्ट चालू हालत में हैं, उन्हें भी अक्सर डॉक्टरों और स्टाफ के लिए आरक्षित कर दिया जाता है। इस कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों और बुजुर्गों को ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुविधा सर्वोपरि है और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी।
















