Chemist Strike News: देशभर के मरीजों और आम नागरिकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। कल, यानी 20 मई को देश के सभी हिस्सों में दवाइयों की दुकानें पूरी तरह से बंद रहेंगी। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के नेतृत्व में देश भर के केमिस्ट ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन के खिलाफ बुधवार को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर जा रहे हैं। देश सहित इस हड़ताल का हिमाचल प्रदेश में भी असर देखने को मिलेगा।
बता दें कि इस अचानक घोषित हुई देशव्यापी हड़ताल के कारण आपातकाल की स्थिति में मरीजों को दवाइयों के लिए भारी दिक्कतों और संकट का सामना करना पड़ सकता है। इस देशव्यापी आंदोलन को मुख्य रूप से अवैध एवं अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स का आरोप है कि ई-फार्मेसी का अनियंत्रित संचालन और कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा दवाओं पर दी जा रही भारी छूट पारंपरिक व्यापार को नष्ट कर रही है। इस व्यवस्था के विरोध में देश के 12.40 लाख से अधिक अधिकृत केमिस्ट और वितरक सड़कों पर उतरने की तैयारी कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि इस बड़े और व्यापक आंदोलन को सफल बनाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश के दवा विक्रेताओं ने भी अपनी सभी दुकानें पूर्णतः बंद रखने का आधिकारिक निर्णय लिया है। हड़ताल के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय प्रशासन के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा।
इस ज्ञापन में जन स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश के लाखों छोटे दवा व्यापारियों के वजूद को बचाने के लिए केंद्र सरकार से तुरंत प्रभावी कदम उठाने की जोरदार मांग की जाएगी। संगठन ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो इस एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल को भविष्य में अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदल दिया जाएगा।
गौरतलब है कि केमिस्ट एसोसिएशन द्वारा ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध करने के पीछे कई गंभीर कारण और चिंताएं बताई गई हैं। संगठन के अनुसार, विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और ई-फार्मेसी कंपनियों द्वारा बिना किसी वैध और सत्यापित चिकित्सीय पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के धड़ल्ले से दवाओं की बिक्री और होम डिलीवरी की आशंका बनी रहती है।
अवैध रूप से होने वाली इस दवा सप्लाई के कारण सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ होने का बड़ा खतरा है। इसके साथ ही, ऑनलाइन माध्यमों पर दवाओं पर भारी छूट देने की अनुचित और असमान नीति से देश के वैध लाइसेंसधारी और छोटे केमिस्ट्स के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
दवा विक्रेताओं का यह भी तर्क है कि इस अनियंत्रित प्रणाली के कारण फर्जी व अप्रमाणित पर्चों का इस्तेमाल अत्यधिक बढ़ सकता है। इससे एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग और नारकोटिक यानी नशीली दवाओं की समाज में आसानी से उपलब्धता होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, खुली छूट मिलने से बाजार में नकली दवाओं की आमद बढ़ने की भी पूरी आशंका जताई गई है।
केमिस्ट एसोसिएशन से जुड़े सदस्यों का संयुक्त रूप से कहना है कि इन कॉर्पोरेट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा अपनाई जा रही अत्यधिक छूट की अनुचित नीति के कारण पारंपरिक और वैध काम करने वाले छोटे केमिस्ट्स का व्यापार खत्म होने की कगार पर है। उन्होंने देश में ऑनलाइन दवा बिक्री पर तुरंत पूर्ण रोक लगाने की मांग रखी है।
उनका कहना है कि देशभर में ऑनलाइन माध्यमों से बिना किसी कड़े और उचित सरकारी नियंत्रण के दवाओं की धड़ल्ले से होम डिलीवरी की जा रही है। इस अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण फार्मासिस्ट और मरीज के बीच का सीधा संवाद पूरी तरह से समाप्त हो जाता है, जो किसी भी चिकित्सा प्रणाली के लिए सही नहीं है।
केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि कॉर्पोरेट जगत और बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियों की विनाशकारी नीतियों के कारण आज देश के छोटे दुकानदारों का कारोबार पूरी तरह खतरे में आ चुका है। ये बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार में एक अनुचित वित्तीय प्रतिस्पर्धा को जन्म दे रही हैं। इस प्रकार की प्रेडेटरी प्राइसिंग के कारण छोटे, कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले दवा दुकानदारों का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त होने के मोड़ पर खड़ा है।
उन्होंने सरकार को सचेत करते हुए कहा कि यदि इस अनियंत्रित व्यवस्था पर तुरंत कानूनी लगाम नहीं लगाई गई, तो भविष्य में आम जनता के लिए जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता, उनकी शुद्धता और उनकी जमीनी उपलब्धता बहुत बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।
दवा विक्रेता संघ ने इस गंभीर विषय पर केंद्र सरकार से तत्काल प्रभाव से हस्तक्षेप करने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही, केमिस्ट एसोसिएशन ने ई-फार्मेसी से जुड़े वर्तमान GSR 817(E) नोटिफिकेशन को तुरंत वापस लेने, कोविड काल के दौरान जारी की गई GSR 220(E) अधिसूचना को पूरी तरह समाप्त करने और देश में अवैध रूप से चल रही ई-फार्मेसी पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग सरकार के समक्ष प्रमुखता से रखी है।

















