Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

चुनावी शोर में दब गए स्थानीय मुद्दे, BBN में प्रधान बनने की कीमत 50 लाख..

बीबीएन में पंचायत चुनाव अब केवल गांव की राजनीति नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक ताकत का बड़ा केंद्र बन चुके हैं। प्रधान पद के लिए उम्मीदवार 50 लाख रुपये तक खर्च कर रहे हैं। अवैध खनन, उद्योगों से जुड़े कारोबार और प्रभाव बढ़ाने की होड़ के चलते चुनावों में पैसों
चुनावी शोर में दब गए स्थानीय मुद्दे, BBN में पंचायत चुनाव इतने महंगे क्यों, प्रधान बनने की कीमत 50 लाख

लवली ठाकुर / BBN: बीबीएन क्षेत्र में पंचायत चुनावों की सरगर्मियां चरम पर हैं। जैसे-जैसे मौसम में गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे चुनावी माहौल भी गर्माता जा रहा है। लेकिन इस शोर-शराबे के बीच क्षेत्र के असली और जमीनी मुद्दे कहीं पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। लोग अब विकास, सुविधाओं और कानून-व्यवस्था की बात करने के बजाय चुनावी समीकरण बैठाने और जीत-हार की रणनीति बनाने में व्यस्त हो गए हैं।

क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा अवैध खनन एक बार फिर चर्चा से गायब हो गया है। प्रशासन और पुलिस चुनावी ड्यूटी में उलझे हुए हैं, जिसका फायदा खनन माफिया खुलकर उठा रहा है। दिन-रात चल रहे अवैध खनन के कारोबार पर लगाम लगाने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। चिंताजनक बात यह है कि इस धंधे से जुड़े कई लोग अब पंचायत चुनावों में भी मैदान में उतर चुके हैं। प्रधान पद हासिल करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, ताकि सत्ता मिलते ही क्षेत्र की बची-खुची जमीनों और संसाधनों पर पकड़ मजबूत की जा सके।

इसे भी पढ़ें:  HRTC Bus Accident: अर्की के सरयांज में बीच सड़क पर पलटी बस, 13 यात्री घायल, अर्की अस्पताल में इलाज जारी

खनन माफिया का प्रभाव इतना बढ़ चुका है कि लोग खुलकर इनके खिलाफ बोलने से भी कतराते हैं। यही हाल नशे के कारोबार का भी है। चुनावों के दौरान शराब बांटना अब आम बात हो गई है, लेकिन वोटरों को लुभाने के लिए अन्य प्रकार के नशों का इस्तेमाल भी खुलेआम हो रहा है। जो व्यक्ति जिस नशे का आदी है, उसे वही उपलब्ध करवाया जा रहा है। यह स्थिति न केवल लोकतंत्र बल्कि समाज के भविष्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

वहीं दूसरी ओर सड़कें, पेयजल संकट, स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली जैसे मूलभूत मुद्दे पूरी तरह धुंधले पड़ गए हैं। चुनावी मंचों पर इन विषयों पर चर्चा बहुत कम दिखाई दे रही है।

इसे भी पढ़ें:  कसौली: होटल में चल रहे देह व्यापार व जुए के धंधे का पुलिस ने किया भंडाफोड़

जिला सोलन का बीबीएन क्षेत्र पंचायत चुनावों में सबसे महंगे चुनावी क्षेत्रों में गिना जाता है। दून विधानसभा क्षेत्र की कुछ पंचायतों में प्रधान पद के उम्मीदवार 50 लाख रुपये तक खर्च कर देते हैं। जिला परिषद चुनावों में खर्च का आंकड़ा इससे भी कहीं अधिक पहुंच जाता है। प्रचार-प्रसार, समर्थकों की फौज और चुनावी प्रबंधन पर जमकर पैसा बहाया जा रहा है।

इस बार पंचायत चुनावों में प्रत्याशियों की बाढ़-सी आ गई है। छोटी-छोटी पंचायतों में प्रधान पद के लिए चार से छह उम्मीदवार तक मैदान में हैं। लंबे समय बाद यह चुनाव भीषण गर्मी के मौसम में हो रहे हैं। 42 डिग्री से अधिक तापमान में भी प्रत्याशी पूरे दिन गांव-गांव घूमकर वोट मांग रहे हैं।

इसे भी पढ़ें:  Press Club Kasauli ने सामाजिक गतिविधियों के आयोजन को लेकर बनाई रूपरेखा

बीबीएन एक औद्योगिक क्षेत्र है, इसलिए यहां पंचायत प्रधान की अपनी अलग ताकत और पहचान होती है। उद्योगों से जुड़े कबाड़, लेबर सप्लाई और अन्य कार्यों में प्रधान की भूमिका काफी प्रभावशाली मानी जाती है। यही कारण है कि यहां पंचायत चुनाव केवल सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी बड़ा केंद्र बन चुके हैं।

जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक होता जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि क्या चुनावी शोर के बीच जनता के असली मुद्दों की आवाज फिर से सुनाई दे पाएगी?

Kasauli International Public School, Sanwara (Shimla Hills)
BBN News BBN News Update

Join WhatsApp

Join Now