HRTC Electric Bus News: हिमाचल पथ परिवहन निगम ने अपने बेड़े में शामिल हो रही नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को लेकर एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। निगम प्रबंधन ने तय किया है कि नई ई-बसों को खस्ताहाल और खराब सड़कों वाले रूटों पर बिल्कुल नहीं चलाया जाएगा। इन आधुनिक बसों को केवल मैदानी क्षेत्रों और शहरों से सटे हुए सुगम रूटों पर ही संचालित किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक खराब सड़कों पर बसों के संचालन में आने वाली तकनीकी और ढांचागत दिक्कतों को देखते हुए प्रबंधन ने यह रणनीतिक कदम उठाया है। बता दें कि एचआरटीसी ने पर्यावरण अनुकूल यातायात को बढ़ावा देने के लिए कुल 297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का ऑर्डर कंपनी को दिया है। इसमें से कंपनी ने 150 इलेक्ट्रिक बसों की पहली खेप निगम को सुपुर्द कर दी है।

इन बसों के हिमाचल पहुंचते ही निगम प्रबंधन ने इन्हें प्रदेश के नौ अलग-अलग डिपो में आवंटित भी कर दिया है। वर्तमान में इन सभी बसों का प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन और विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही बसें रूटों पर उतरेंगी। उधर हिमाचल पथ परिवहन निगम प्रबंधन इन बसों को रूट पर उतारने के लिए एक औपचारिक समारोह की तैयारी कर रहा है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इन नई ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके लिए एचआरटीसी प्रबंधन ने मुख्यमंत्री कार्यालय से समय मांगा है। जैसे ही मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुमति मिलेगी योजना को अंतिम रूप दे दिया जायेगा।
गौरतलब है कि अब तक प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन मुख्य रूप से शिमला, मनाली, मंडी और धर्मशाला जैसे बड़े और पर्यटन केंद्रित शहरों तक ही सीमित था, लेकिन नई योजना के तहत अब मैदानी इलाकों में बड़े पैमाने पर ई-बसें दौड़ती नजर आएंगी।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जारी किए गए नए आवंटन के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के गृह जिला ऊना को सबसे ज्यादा ई-बसें मिली हैं। ऊना और हमीरपुर डिपो को सबसे अधिक 35-35 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। इसके अलावा बिलासपुर डिपो को 20, नालागढ़ और नाहन डिपो को 15-15, जबकि देहरा और पालमपुर डिपो को 10-10 बसें दी गई हैं। वहीं, धर्मशाला और तारादेवी (शिमला) डिपो को 5-5 बसें आवंटित की गई हैं, जबकि शेष बसों को आवश्यकतानुसार अन्य डिपो में 1 या 2 की संख्या में बांटा जाएगा।
बताया जा रहा है कि निगम ने नई बसों को सड़कों पर उतारने से पहले कुल 36 रूटों पर इनका कड़ा ट्रायल रन किया था। इस परीक्षण के दौरान एक विशिष्ट रूट पर इलेक्ट्रिक बस का ट्रायल फेल हो गया। आपूर्ति करने वाली कंपनी ने इस पर तर्क दिया है कि संबंधित रूट की सड़क अत्यधिक खराब है, जिसके कारण बस का प्रदर्शन प्रभावित हुआ। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एचआरटीसी प्रबंधन ने विस्तृत जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को भी शामिल किया गया है, जो सड़क की स्थिति की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
वहीं रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि एचआरटीसी में ई-बसों की खरीद प्रक्रिया लगातार जारी है और लगभग 150 बसें कंपनी द्वारा भेजी जा चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस एक रूट पर बस का ट्रायल फेल हुआ था, उसके लिए कमेटी गठित कर दी गई है जो पूरे मामले की जांच कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी साझा की कि पिछले तीन वर्षों के भीतर एचआरटीसी ने अपने बेड़े को मजबूत करने के लिए कुल 813 नई बसों की खरीद पूरी की है।
















