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Solan News: ‘स्कूटर और अकेले पैदल’ श्रीखंड महादेव यात्रा! 19 साल के तुषार आनंद ने ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज करवाया अपना नाम

Shrikhand Mahadev Yatra 2026: कसौली के 19 वर्षीय तुषार आनंद ने विपरीत मौसम और दुर्गम रास्तों का सामना करते हुए अकेले स्कूटर और पैदल यात्रा कर श्रीखंड महादेव के दर्शन किए। इस अभूतपूर्व उपलब्धि को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराया है।
Published on: 1 July 2026
Solan News: 'स्कूटर' से अकेले श्रीखंड महादेव यात्रा! 19 साल के तुषार आनंद ने 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज करवाया अपना नाम

Solan News: कसौली निवासी तुषार आनंद ने मात्र 19 वर्ष की आयु में एक साहसिक एवं आध्यात्मिक उपलब्धि प्राप्त करते हुए 15 जून 2026 से 18 जून 2026 तक अकेले स्कूटर से अपने घर कसौली से श्रीखंड महादेव यात्रा पूर्ण कर इतिहास रच दिया।

तुषार आनंद ने अपनी यात्रा 15 जून 2026 को प्रातः 3:30 बजे कसौली से स्कूटर द्वारा अकेले प्रारम्भ की। मार्ग में नारकंडा, निरमंड, जांव होते हुए पैदल यात्रा आरम्भ की तथा थाचडू, काली टॉप, भीमद्वारी और पार्वती बाग जैसे कठिन पड़ावों को पार करते हुए 17 जून 2026 की प्रातः लगभग 7:00 बजे समुद्र तल से लगभग 5,660 मीटर (18,570 फीट) की ऊँचाई पर स्थित पवित्र श्रीखंड महादेव के दर्शन किए।

यह संपूर्ण यात्रा उन्होंने बिना किसी साथी के, पूर्णतः एकल रूप से संपन्न की। यात्रा के दौरान उन्होंने अत्यंत कठिन हिम क्षेत्र, गहरी बर्फ, तीव्र वर्षा, ओलावृष्टि, तेज़ हवाओं तथा दुर्गम पर्वतीय मार्गों जैसी अनेक प्राकृतिक चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना किया। प्रतिकूल मौसम के कारण उन्हें पर्वत पर निर्धारित स्थानों पर रात्रि विश्राम भी करना पड़ा।

शिखर से लौटते समय भी भीषण ओलावृष्टि और खराब मौसम के कारण उन्हें भीम डवारी में रुकना पड़ा। इसके पश्चात 18 जून 2026 को वापसी यात्रा पूर्ण करते हुए निरमंड होते हुए उसी दिन रात्रि लगभग 8:00 बजे अपने निवास कसौली पहुँचे।

तुषार आनंद की इस अद्वितीय उपलब्धि को इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स द्वारा सत्यापन के उपरांत मान्यता प्रदान की गई है। उन्हें “सबसे कम आयु में अकेले स्कूटर से श्रीखंड महादेव की एकल तीर्थयात्रा पूर्ण करने वाले युवा” के रूप में सम्मानित किया गया है।

यह उपलब्धि केवल साहसिक पर्वतारोहण का उदाहरण नहीं है, बल्कि युवाओं के लिए आस्था, आत्मविश्वास, अनुशासन, धैर्य, आत्मनिर्भरता और संकल्प का भी प्रेरणास्रोत है।

तुषार आनंद ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, देवी-देवताओं के आशीर्वाद तथा कठिन परिस्थितियों में अटूट विश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति को दिया है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं को परखने, आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करने और अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने का प्रयास थी।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं को यह संदेश देना है कि सच्ची श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ कोई भी कठिन लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश, विशेषकर कसौली तथा जिला सोलन के लिए भी गौरव का विषय है।

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