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कुल्लू अस्पताल में प्रसूता मौत मामले में डॉक्टर के बाद स्टाफ नर्स सस्पेंड, सुरक्षा को लेकर मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन का ढालपुर में प्रदर्शन

कुल्लू अस्पताल में प्रसूता की मौत पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद बवाल थम गया है, लेकिन अब डॉक्टर भड़क गए हैं। डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन ने ढालपुर तक जुलूस निकालकर अपना रोष जताया।
Published on: 2 July 2026
Kullu Hospital Case Update: कुल्लू अस्पताल में प्रसूता मौत मामले में डॉक्टर के बाद स्टाफ नर्स सस्पेंड, सुरक्षा को लेकर मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन का ढालपुर में प्रदर्शन

Kullu Hospital Case Update: हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में प्रसूता रजनी शर्मा उर्फ मंजू की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स रेशमा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंशन की अवधि के दौरान रेशमा का मुख्यालय डीडीयू अस्पताल शिमला फिक्स किया गया है। इससे पहले मामले की आरोपी गायनी डॉक्टर अनु को भी मंगलवार को निलंबित कर उनका मुख्यालय शिमला बदला जा चुका है।

यह पूरी कार्रवाई कुल्लू अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट की रिपोर्ट के आधार पर अमल में लाई गई है। स्टाफ नर्स रेशमा पर ड्यूटी के दौरान मरीज और तीमारदारों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने और पेशेवर आचरण के विपरीत व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। रेशमा के खिलाफ CCS (CCA) रूल्स 1965 के तहत विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी दूसरी स्टाफ नर्स सोनिया पर भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जिसकी जांच अभी जारी है।

इस पूरे मामले की शुरुआत 21 जून को हुई थी, जब कुल्लू अस्पताल में इलाज के दौरान रजनी शर्मा की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि जब रजनी गंभीर हालत में थीं, तब डॉ. अनु देवी ने उनकी पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया और समय पर उचित उपचार उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद बीते सोमवार और मंगलवार को मंडी और कुल्लू जिला के हजारों लोगों ने अस्पताल के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रशासन ने डॉ. अनु को सस्पेंड करने की कार्रवाई की थी।

प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल में हुए भारी हंगामे और गेट तोड़े जाने के विरोध में अब हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन (HMOA) और इंडियन मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन पूरी तरह सड़क पर उतर आए हैं। डॉक्टरों और नर्सों ने बुधवार को अस्पताल परिसर से ढालपुर चौक तक एक विशाल मौन जुलूस निकाला। डॉक्टरों के संगठन ने अस्पताल में हंगामा करने और अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है।

एसोसिएशन ने डीसी कुल्लू के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल और स्वास्थ्य सचिव सुधा देवी को एक ज्ञापन भेजा है। इसके अलावा एएसपी कुल्लू संजीव चौहान को भी शिकायत सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। डॉक्टरों का आरोप है कि संजय चौहान, बंटी सराजी और सुमित ठाकुर सहित अन्य लोगों ने 2,000 से 2,500 लोगों की भीड़ को अस्पताल में बुलाया था, जिसने आपातकालीन विभाग, बाल रोग वार्ड और प्रशासनिक कार्यालयों में पहुंचकर हुड़दंग मचाया।

मेडिकल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कोहली और महेश कपूर ने बताया कि हुड़दंगियों ने डॉक्टरों और नर्सों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें ‘हत्यारा’ कहा। इसके अलावा सीएमओ और एमएस पर दबाव बनाकर आंतरिक विभागीय रिपोर्ट को सार्वजनिक रूप से पढ़वाया गया और उसका फेसबुक लाइव भी किया गया। संगठन का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों के नाम और फोटो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने से डॉक्टरों और उनके परिवारों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन की अध्यक्ष अमिता पॉल ने स्टाफ नर्सों का बचाव करते हुए कहा कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। अस्पताल में स्टाफ नर्सों पर काम का अत्यधिक बोझ है। घटना वाले दिन यानी 21 जून को अस्पताल में मंजू शर्मा की डिलीवरी के साथ-साथ 9 अन्य गर्भवती महिलाओं की भी डिलीवरी हुई थी। डॉक्टरों का कहना है कि हंगामे के समय अस्पताल में 218 मरीज भर्ती थे और 11 आपातकालीन उपचार में थे, जिससे सामान्य कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई।

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