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Mandi News: सरकाघाट के बहुचर्चित होमगार्ड हत्याकांड में 10 साल बाद आया कोर्ट का बड़ा फैसला, 3 दोषियों को उम्रकैद और लाखों का जुर्माना

Himachal Crime News: मंडी जिले के सरकाघाट की अदालत ने साल 2016 के जोगिंद्र सिंह हत्याकांड में तीन दोषियों को आजीवन कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई है।
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Mandi News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट में वर्ष 2016 में हुए बहुचर्चित होमगार्ड जोगिंद्र सिंह हत्याकांड में अदालत ने अपना अहम और बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरकाघाट डॉ. अबीरा वासू की अदालत ने इस मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया है।

अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में की गई मजबूत पैरवी के कारण आखिरकार पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। अदालत ने इस जघन्य वारदात के लिए तीन आरोपियों संजय शर्मा उर्फ संजू, मनीष कुमार उर्फ शेनकी और पंकज सोनी उर्फ सोनी को दोषी करार दिया है। इस मामले में कुल चार आरोपी शामिल थे, जिनमें से चौथे आरोपी रितेश उर्फ कालू की अदालत में ट्रायल चलने के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है।

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न्यायालय ने जीवित बचे तीनों दोषियों को पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी सजा और जुर्माने से दंडित किया है। उप जिला न्यायवादी राजीव शर्मा ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरी घटना 31 दिसम्बर, 2016 की रात को पेश आई थी। उस रात होमगार्ड जवान जोगिंद्र सिंह अपने साथी जवान धनी राम के साथ सरकाघाट बाजार में नाइट गश्त पर तैनात थे।

इसी दौरान बाजार में उनकी कुछ युवकों के साथ किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यह विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने दोनों होमगार्ड जवानों पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में होमगार्ड जोगिंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वारदात के तुरंत बाद उन्हें घायल अवस्था में पहले सिविल अस्पताल सरकाघाट ले जाया गया।

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वहां प्राथमिक उपचार के दौरान उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें हमीरपुर अस्पताल रैफर कर दिया था, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की थी।

इस मामले को न्याय तक पहुंचाने के लिए पुलिस और अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में कुल 28 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। इसके साथ ही कई अन्य पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इन सभी ठोस साक्ष्यों और चश्मदीद गवाहियों के आधार पर ही अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने तीनों आरोपियों को मुख्य दोषी ठहराते हुए यह कड़ी सजा सुनाई है।

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न्यायालय ने तीनों दोषियों को आईपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 1-1 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके अलावा धारा 353 के तहत 2 वर्ष का कारावास और 20-20 हजार रुपए का जुर्माना, तथा धारा 332 के तहत 3 वर्ष का कारावास और 30-30 हजार रुपए के जुर्माने की सजा मुकर्रर की है। अदालत ने अपने फैसले में यह पूरी तरह से स्पष्ट किया है कि दोषियों की ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

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