Sirmour News: हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर अंतर्गत उपमंडल मुख्यालय संगड़ाह से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां अनुसूचित जाति परिवार से सम्बंध रखने वाली एक गरीब महिला कमलेश देवी पिछले कई सालों से अपनी शामलात जमीन के अधिकार और न्याय के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं। शासन-प्रशासन के चक्कर काटने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़िता ने 22 सितंबर 2023 को संगड़ाह से जिला मुख्यालय नाहन तक 65 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा की थी।
नाहन पहुंचकर उन्होंने उपायुक्त सिरमौर को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा था, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि आज दिन तक उस ज्ञापन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और न ही उसकी स्थिति का पता चल सका। इसी बीच न्याय की बाट जोह रही कमलेश देवी के सामने अब एक नया और गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

पीड़िता के 5 छोटे-छोटे बच्चे हैं और हालिया बरसात के कारण उनकी रिहायशी झोपड़ी काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। जब भी पीड़िता अपने मासूम बच्चों के सिर छुपाने के लिए इस झोपड़ी की मरम्मत का कार्य शुरू करती है, तो पुलिस थाना संगड़ाह के कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचकर काम रुकवा देते हैं। पीड़िता का कहना है कि स्थिति यह हो गई है कि उनके घर पर एक ही दिन में दो-दो बार पुलिस आ जाती है, जिससे पूरा परिवार बुरी तरह दहशत के माहौल में जीने को मजबूर है।
अपनी आपबीती सुनाते हुए कमलेश देवी का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैं दिन भर अपने बच्चों के लिए दो रोटी का साधन करूं या पुलिस वालों से बात करती रहूं, मुझे समझ नहीं आ रहा।” इस कठिन परिस्थिति के बावजूद पीड़िता ने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया है। अपने संघर्ष के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कमलेश देवी ने कहा, “मैं मरते दम तक लड़ाई लड़ूंगी। मैं शेर दिन इंसान की बेटी हूं, भले ही अनुसूचित जाति में पैदा हुई हूं, मैं अपनी हिम्मत नहीं तोड़ूंगी।”
पीड़िता ने इस पुलिसिया दबाव बनाने के पीछे स्थानीय राजनीतिक दबाव का भी गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रेणुका जी क्षेत्र के एक बड़े नेता के संरक्षण में एक प्रमुख राजनीतिक दल से जुड़े वर्तमान रेणुका मंडल अध्यक्ष उन्हें लगातार दबाने का प्रयास कर रहे हैं और उनका आशियाना गिरवाना चाहते हैं। इस मामले को लेकर कमलेश देवी पहले भी हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री से गुहार लगा चुकी हैं। शासन-प्रशासन से निराशा मिलने के बाद उन्होंने न्याय के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहां फिलहाल यह मामला विचाराधीन है।
अदालत की शरण में मामला जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, तो ऐसी स्थिति में संगड़ाह पुलिस द्वारा बार-बार इस गरीब महिला के घर जाने का औचित्य समझ से परे है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या किसी के राजनीतिक इशारे पर इस अनुसूचित जाति परिवार को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है? अब इस पूरे प्रकरण में सिरमौर प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है ताकि पीड़ित महिला को उचित सुरक्षा और न्याय मिल सके।
-राजेंदर कुमार


















