Solan News: हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने और ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के बड़े-बड़े दावे कर रही है। लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत स्वास्थ्य मंत्री के अपने गृह जिला सोलन में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। दून विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी इलाके पट्टा महलोग की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) खुद बीमार चल रही है। करीब 20 हजार की आबादी को चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से स्थापित इस अस्पताल में डॉक्टरों और बुनियादी सुविधाओं का भारी अकाल है।
हाल ही में दून विधानसभा क्षेत्र के एखु गांव में एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया। यहां एक परिवार रात को एक साथ बैठकर खाना खा रहा था, जिसमें भिंडी की सब्जी बनी थी। आधा खाना खाने के बाद जब कड़ाही में देखा गया, तो सबके होश उड़ गए। सब्जी के बीच एक मरी हुई छिपकली तैर रही थी। यह देखते ही परिवार के सदस्यों को घबराहट और उल्टी की शिकायत शुरू हो गई। देखते ही देखते तीन मरीजों की तबीयत बेहद बिगड़ गई और वे तड़पने लगे।

परिजनों द्वारा आनन-फानन में तीनों मरीजों को गंभीर हालत में CHC पट्टा महलोग लाया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही बदहाली का जो मंजर दिखा, उसने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी। मौके पर कोई भी मुख्य डॉक्टर उपस्थित नहीं था, क्योंकि डॉक्टरों को डेपुटेशन पर भेजा गया है। हालांकि, वहां तैनात पैरामेडिकल स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाई और सीमित संसाधनों के बीच मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया। लेकिन मुख्य डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को जो विशेषज्ञ और उचित इलाज मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल सका।
स्थानीय निवासियों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि दून का यह पहाड़ी क्षेत्र सरकार को रोजाना करोड़ों रुपये का टैक्स देता है। इसके बावजूद जब विकास और बुनियादी सुविधाओं की बात आती है, तो इस क्षेत्र को हाशिए पर धकेल दिया जाता है। इस स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की भारी कमी है और सुविधाएं शून्य हैं। अस्पताल में टेस्ट की कोई व्यवस्था नहीं है और एक्स-रे मशीन भी काम नहीं कर रही है। आपातकालीन स्थिति में गंभीर मरीजों को रेफर करने के लिए एम्बुलेंस तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब इस स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले पट्टा महलोग से घयाण सड़क पर बडैहरी निवासी भागी राम एक अज्ञात वाहन की टक्कर से गिरने के कारण लहूलुहान और बेसुध हालत में मिले थे। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें तुरंत पट्टा सीएचसी पहुंचाया गया, लेकिन वहां आपातकालीन स्थिति के बावजूद कोई मुख्य डॉक्टर मौजूद नहीं था। ड्यूटी पर केवल एक दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) और महिला स्टाफ तैनात थे।
घायल भागी राम की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें प्राथमिक उपचार के तौर पर टांके तक लगाने की व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल में एक्स-रे मशीन तो है, लेकिन उसे चलाने के लिए कोई ऑपरेटर या टेक्नीशियन तैनात नहीं है। हद तो तब हो गई जब मरीज को रेफर करने के लिए एम्बुलेंस तक नहीं मिली। अंततः प्रदीप ठाकुर नामक एक स्थानीय व्यक्ति ने दरियादिली दिखाते हुए अपनी निजी गाड़ी से घायल को बद्दी अस्पताल पहुँचाया, जहाँ फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।
इस बार-बार की अव्यवस्था के खिलाफ ‘आपकी आवाज पट्टा महलोग’ मंच के मुखर सामाजिक कार्यकर्ता राजू भाई ने जनता से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव से पहले ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे लगाने वाले नेता आज जनता का दुख-दर्द भूल चुके हैं। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे नेताओं के पीछे झंडे लहराना और जयकारे लगाना छोड़ें। चुनाव के समय मिलने वाली शराब और चंद पैसों के लालच में आकर अपना भविष्य न बेचें, बल्कि वोट देने से पहले स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर हिसाब मांगें।
स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग तथा प्रदेश सरकार से मांग की है कि पट्टा महलोग CHC में तुरंत स्थाई डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए। इसके साथ ही एक्स-रे मशीन के लिए ऑपरेटर, टेस्ट की सुविधाएं और चौबीस घंटे एम्बुलेंस सेवा बहाल की जाए। जनता ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इन बुनियादी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले समय में क्षेत्र के लोग एक उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


















