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मणिमहेश यात्रा में अब रोजाना केवल 5,000 श्रद्धालुओं को ही मिलेगी अनुमति, कुगती मार्ग पर लगा प्रतिबंध

Manimahesh Yatra Updates: पिछले साल आई भीषण बाढ़ और हादसों से सबक लेते हुए चंबा प्रशासन ने इस साल मणिमहेश यात्रा के लिए नए सुरक्षा नियम लागू किए हैं। इसके तहत अब प्रतिदिन केवल 5,000 यात्री ही पवित्र झील के दर्शन कर सकेंगे।
Manimahesh Yatra 2026: मणिमहेश यात्रा में अब रोजाना केवल 5,000 श्रद्धालुओं को ही मिलेगी अनुमति, कुगती मार्ग पर लगा प्रतिबंध

Manimahesh Yatra 2026: उत्तर भारत की प्रसिद्ध और पवित्र हिमालयी तीर्थयात्राओं में शामिल मणिमहेश यात्रा को लेकर चंबा प्रशासन ने इस साल सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पिछले साल आई भयानक बाढ़ और हादसों से सबक लेते हुए प्रशासन ने इस बार यात्रा के स्वरूप में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब अमरनाथ यात्रा की तर्ज पर ई-पास सिस्टम के जरिए यात्रियों की संख्या को नियंत्रित किया जाएगा।

बता दें कि इस साल भगवान शिव को समर्पित यह सालाना यात्रा 25 अगस्त से शुरू होने जा रही है। प्रशासन के नए नियमों के मुताबिक, आगामी यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 1 अगस्त से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

शुरुआती चरण में रोजाना केवल 5,000 यात्रियों को ही यात्रा पर जाने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, कृष्ण जन्माष्टमी और राधाष्टमी के विशेष अवसरों पर मौसम की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और रास्ते की क्षमता को देखते हुए इस कोटे को बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही पूरी यात्रा के दौरान ड्रोन के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

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यह कड़े कदम पिछले साल यात्रा के दौरान पैदा हुई अभूतपूर्व आपदा के बाद उठाए गए हैं। पिछले साल लगातार हुई भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ से चंबा-भरमौर हाईवे के कई हिस्से बह गए थे, जिसके चलते 15,000 से अधिक श्रद्धालु वहां फंस गए थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि सेना, वायु सेना, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद से मणिमहेश यात्रा के इतिहास का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा था।

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डिप्टी कमिश्नर मुकेश रेपसवाल ने बताया कि अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और स्लॉट बुकिंग लागू होने से यात्रियों की आवाजाही को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने और भीड़ को रोकने में मदद मिलेगी। किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन तेजी से कार्रवाई कर सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा, जिसमें वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निपटान और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक शामिल है।

सुरक्षा के लिहाज से इस बार एक और बड़ा फैसला लिया गया है। भरमौर के एसडीएम विकास शर्मा के अनुसार, इस साल आम यात्रियों के लिए कुगती गांव से होकर जाने वाला पारंपरिक परिक्रमा मार्ग पूरी तरह बंद रहेगा। पिछले साल यात्रा के दौरान हुई करीब दो दर्जन मौतों में से 17 मौतें अकेले इसी दुर्गम रास्ते पर हुई थीं। हालांकि, लाहौल-स्पीति की तरफ से आने वाले उन श्रद्धालुओं को इस मार्ग के इस्तेमाल की छूट रहेगी, जिनके लिए यह रास्ता विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

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बता दें कि हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हड़सर से पीर पंजाल रेंज में 4,080 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र मणिमहेश झील तक 14 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करते हैं। प्रशासन का मानना है कि इन नए उपायों से इस दुर्गम हिमालयी यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाया जा सकेगा।

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