Parliament March Violence Case: दिल्ली में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़प के मामले में दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस प्रशासन ने मामले में दर्ज प्राथमिकी (FIR) में हत्या के प्रयास समेत कई अन्य अत्यंत गंभीर धाराएं जोड़ दी हैं। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान मौजूद भीड़ ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों को निशाना बनाते हुए उन पर जानलेवा हमला किया था, जिसके परिणामस्वरूप कई सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।
जानकारी के मुताबिक यह पूरी कार्रवाई नई दिल्ली के कर्तव्य पथ थाने में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर की गई है, जो वहां तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज की गई थी। पुलिस सूत्रों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ को उकसाया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स तोड़कर संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश करने लगे। रेल भवन और संसद परिसर के बेहद समीप हुई इस घटना को सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

इंस्पेक्टर की शिकायत और घटनाक्रम
कर्तव्य पथ थाने में दर्ज एफआईआर में घटना के विस्तृत विवरण का उल्लेख किया गया है। शिकायत के मुताबिक, संबंधित इंस्पेक्टर की ड्यूटी सुबह 5 बजे से जोन-11 (पिंक बूथ) पर लगाई गई थी। वायरलेस संदेश के माध्यम से हिंसक गतिविधियों की सूचना मिलते ही पुलिस बल तत्काल रेल भवन राउंडअबाउट के पास लगाए गए बैरिकेड्स पर पहुंचा। पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची, तब तक वहां हजारों की संख्या में उग्र प्रदर्शनकारी एकत्र हो चुके थे।
पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट रूप से सूचित किया गया था कि क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू है और वहां किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। लाउडस्पीकर के माध्यम से बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी भीड़ पीछे हटने को तैयार नहीं हुई और लगातार उग्र नारेबाजी करती रही।
जानलेवा हमला और पुलिस की कार्रवाई
एफआईआर में किए गए दावों के अनुसार, कुछ लोगों के उकसावे में आकर भीड़ ने अचानक पुलिसकर्मियों को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिसबल पर पत्थर, चप्पलें और अन्य वस्तुएं फेंकना शुरू कर दिया। एफआईआर में साफ कहा गया है कि भीड़ ने कर्तव्य पर तैनात जवानों की हत्या करने की नीयत से उन पर जानलेवा हमला किया, जिसमें कई जवान चोटिल हुए।
संसद भवन और अन्य अति-संवेदनशील राष्ट्रीय संस्थानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
BNS की 13 गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कुल 13 गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इसमें मुख्य रूप से धारा 109(1) यानी हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी गई है। इसके अलावा, दर्ज मामले में निम्नलिखित आरोप शामिल हैं:
- सरकारी कर्मचारियों पर ड्यूटी के दौरान हमला करना।
- सरकारी कार्य में बाधा डालना।
- गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जमा करना और दंगा भड़काना।
- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना।
- मानव जीवन को खतरे में डालने वाले कृत्य करना।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई को हुई इस हिंसा में 129 पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इस पूरी घटना के संदर्भ में पुलिस द्वारा अब तक लगभग 15 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
गलत अफवाहों पर पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस
दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और इस पूरी घटना से संबंधित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही भ्रामक जानकारियों और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए दिल्ली पुलिस शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगी। इस संबंध में सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर मीडिया के समक्ष उपस्थित होकर पुलिस का आधिकारिक पक्ष रखेंगे और स्थिति को स्पष्ट करेंगे।


















