Himachal Vigilance FIR Sudhir Sharma: हिमाचल प्रदेश विजिलेंस ने पूर्व कांग्रेस मंत्री और वर्त्तमान में धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर दी है। राज्य में इस कार्रवाई के बाद से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विजिलेंस की जांच का मुख्य बिंदु पिछले एक दशक के दौरान अर्जित की गई उनकी चल और अचल संपत्तियां हैं, जिनकी वित्तीय समीक्षा की जाएगी।
विजिलेंस विभाग के अनुसार, धर्मशाला थाना में दर्ज एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(1)(बी) और 13(2) को शामिल किया गया है। आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर जांच की समयावधि 1 अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2023 तक तय की गई है। इस 10 साल की अवधि के दौरान विधायक द्वारा अर्जित की गई सभी परिसंपत्तियों का ब्योरा एकत्र किया जाएगा।

जांच के विस्तृत दायरे में सुधीर शर्मा के नाम और उनसे जुड़े बैंक खाते, विभिन्न क्षेत्रों में किए गए निवेश, अचल संपत्तियां और आय के सभी वैध व अवैध स्रोतों को शामिल किया जाएगा। विजिलेंस की टीम इस पूरी अवधि में अर्जित कुल संपत्तियों का मिलान उनकी आय के ज्ञात और घोषित स्रोतों से करेगी। विभाग का कहना है कि यह जांच पूरी तरह से निष्पक्ष, साक्ष्यों और प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।
दूसरी ओर, एफआईआर दर्ज होने की सूचना सार्वजनिक होने के बाद विधायक सुधीर शर्मा ने राज्य सरकार की इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम करार दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि उनके घर की पैमाइश पहले भी तीन बार की जा चुकी है और उन्होंने कुछ भी छिपाया नहीं है। उनके अनुसार, उनके घर के दरवाजे जांच एजेंसियों के लिए हमेशा खुले हैं तथा उनकी संपत्ति से जुड़ी तमाम जानकारी पहले से ही पब्लिक डोमेन में मौजूद है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सीधा निशाना साधते हुए सुधीर शर्मा ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री भाजपा की ओर से तैयार की गई चार्जशीट से घबरा गए हैं। उनका आरोप है कि इसी घबराहट की वजह से मुख्यमंत्री अब डिफेंस मोड में आकर लगातार सेल्फ गोल कर रहे हैं। सुधीर शर्मा ने दावा किया कि प्रदेश सरकार अपनी असफलताओं को छिपाने और आम जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने के उद्देश्य से इस प्रकार की दबावकारी कार्रवाई का सहारा ले रही है।
वहीं दूसरी तरफ, जांच एजेंसी विजिलेंस ने इस राजनीतिक बयानबाजी से दूरी बनाते हुए स्पष्ट किया है कि मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी आवश्यक कागजी सबूतों और वित्तीय दस्तावेजों की निष्पक्ष पड़ताल की जाएगी। विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक, जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की रूपरेखा तय की जाएगी।


















