SC Scholarship Scheme 2026: लोकसभा में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही छात्रवृत्ति योजनाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। शिमला संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए संचालित पोस्ट मैट्रिक और प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल केंद्र सरकार के समक्ष रखे। सांसद ने देश, राज्य तथा जिला स्तर पर प्राप्त आवेदनों, स्वीकृत छात्रवृत्तियों, लाभार्थियों की कुल संख्या और निधि आवंटन की जानकारी मांगी। इसके साथ ही उन्होंने विशेष रूप से अपने शिमला लोकसभा क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों की विस्तृत स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया।
इस प्रश्न का आधिकारिक उत्तर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने लोकसभा के पटल पर रखा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के शैक्षणिक उत्थान के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति और प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएं निरंतर लागू की जा रही हैं। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि इन योजनाओं के पारदर्शी संचालन के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, ताकि धनराशि बिना किसी बाधा के सही हाथों तक पहुंच सके।

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने बताया कि इन छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे पात्र विद्यार्थियों के आधार-सीडेड बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता है। डीबीटी प्रणाली को लागू करने से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। इसके परिणामस्वरूप, छात्रवृत्ति की निर्धारित धनराशि समय पर और सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंच रही है, जिससे छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक मदद मिल रही है।
आर्थिक भागीदारी के ढांचे की जानकारी देते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में केंद्र और राज्यों के बीच सामान्यतः 60:40 के अनुपात में वित्तीय भागीदारी होती है। वहीं, हिमाचल प्रदेश जैसे विशेष राज्यों के लिए प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में 90:10 के अनुपात का प्रावधान किया गया है, जिसमें 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करती है। इसके अलावा, छात्रवृत्ति के लिए आवेदन, दस्तावेज सत्यापन, स्वीकृति तथा अस्वीकृति की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाते हुए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाता है।
सदन में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शिमला जिले में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत वर्ष 2022-23 में 2,668 विद्यार्थियों को लाभ मिला। इसके बाद वर्ष 2023-24 में भी 2,668 लाभार्थी दर्ज किए गए। वहीं, वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 2,870 हो गई और वर्ष 2025-26 में 2,856 लाभार्थियों को इस योजना का लाभ प्रदान किया गया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना का लाभ लगातार छात्रों तक पहुंच रहा है।
वहीं, प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के आंकड़ों पर नजर डालें तो शिमला जिले में वर्ष 2022-23 में 2,104 और वर्ष 2023-24 में 2,104 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिली। वर्ष 2024-25 में लाभार्थियों की संख्या 2,539 रही, जबकि वर्ष 2025-26 में 2,049 विद्यार्थियों को योजना के तहत लाभ प्रदान किया गया। सरकार द्वारा पोर्टल के माध्यम से हर वर्ष प्राप्त आवेदनों का नियमित सत्यापन कर पारदर्शी तरीके से राशि स्वीकृत की जा रही है।
संसद में जानकारी सामने आने के बाद सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इन छात्रवृत्ति योजनाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और जवाबदेह बनाया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन कल्याणकारी योजनाओं से हिमाचल प्रदेश, विशेष रूप से शिमला संसदीय क्षेत्र के हजारों जरूरतमंद विद्यार्थियों को भविष्य में भी निरंतर लाभ मिलता रहेगा।


















