Solan News: सोलन जिले के औद्योगिक शहर परवाणू के मुख्य बाजार में सुरक्षा नियमों की अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है। विकास गैस एजेंसी द्वारा एलपीजी गैस सिलेंडरों से भरी गाड़ी को बाजार के बीचों-बीच खड़ा किया जा रहा है। जिस जगह पर यह वाहन पार्क किया जाता है, वहां दिनभर दुकानदारों, ग्राहकों, महिलाओं और बच्चों की भारी आवाजाही बनी रहती है। आसपास कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं, जिसके कारण किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री से भरे वाहन को इतनी व्यस्त जगह पर खड़ा करने की अनुमति किसने दी। एलपीजी जैसी संवेदनशील सामग्री के परिवहन, भंडारण और हैंडलिंग के लिए कड़े सुरक्षा नियम निर्धारित हैं। इसके बावजूद भीड़भाड़ वाले इलाके में गैस सिलेंडरों से लदे वाहन को खड़ा करना सामान्य पार्किंग का विषय नहीं माना जा सकता। मीडिया द्वारा इस मुद्दे को पहले भी प्रमुखता से उठाया जा चुका है, लेकिन स्थिति में सुधार न होना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है।

मामले को लेकर एलपीजी के फील्ड अफसर अर्जुन ने रुख साफ करते हुए कहा कि किसी को भी मार्केट के बीचों-बीच भरे हुए गैस सिलेंडरों की गाड़ी खड़ी करने की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विकास गैस एजेंसी द्वारा नियमों का उल्लंघन कर वाहन खड़ा किया जा रहा है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जब मौके पर मौजूद एजेंसी के कर्मचारियों से इस संबंध में जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने मामले की जानकारी न होने की बात कहकर स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।
प्रशासनिक स्तर पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग (DCFSC) सोलन के अधिकारी श्रवण कुमार ने बताया कि गैस एजेंसी को निर्धारित नियमों और गाइडलाइंस के अनुसार ही कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में संबंधित एजेंसी गाइडलाइंस का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनके इस बयान से साफ है कि विभाग सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर गंभीर है।
नगर परिषद परवाणू के कार्यकारी अधिकारी (EO) संदीप कुमार ने भी मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि लोगों की जान और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि मार्केट क्षेत्र में नियमों के विपरीत वाहन खड़ा किया जा रहा है, तो संबंधित विभागों को पत्र लिखकर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
अधिकारियों के बयानों के बाद अब मुख्य सवाल यह है कि जब किसी विभाग के पास ऐसी अनुमति नहीं है, तो जमीनी स्तर पर यह स्थिति कैसे बनी हुई है। प्रशासन और संबंधित विभागों को तत्काल मौके का निरीक्षण कर लोडिंग-अनलोडिंग के नियम, सप्लाई वाहन के निर्धारित स्थान और अनिवार्य सुरक्षा मानकों की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी देखना होगा कि पूर्व में मामला उजागर होने के बाद क्या कार्रवाई की गई थी।
आखिर परवाणू पुलिस क्यों बनी रही मूकदर्शक?
वहीं सबसे बड़ा सवाल परवाणू पुलिस की ट्रैफिक व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। अगर कोई आम वाहन सड़क किनारे या मार्केट में गलत जगह पर पार्क हो, तो पुलिस तुरंत चालान काट देती है। लेकिन यहाँ लंबे समय से ऐसी ही अव्यवस्था बनी हुई है। पुलिस की इस ढिलाई का आखिर जिम्मेदार कौन है?
सिलेंडरों से लदे ये ट्रक किसी बारूद के ढेर से कम नहीं हैं। यदि कोई अनहोनी होती है, तो उस बड़ी तबाही की जवाबदेही किसकी होगी? यह सवाल पुलिस के उच्च अधिकारियों से भी है कि आखिर उनकी नाक के नीचे ऐसी अव्यवस्था कैसे फल-फूल रही है? ऐसी व्यवस्था पर तो संबंधित गैस एजेंसी पर मामला दर्ज होना चाहिए था। लेकिन अब तक ऐसा क्यों नहीं हुआ ये भी बड़ा सवाल है.!


















