Kishau Dam Project: हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर राज्य सरकार का रुख स्पष्ट किया है। शिमला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना में प्रदेश के हितों का पूर्ण संरक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि परियोजना के बिजली घटक को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, जबकि इस परियोजना के शुरू होने से राज्य को प्रतिवर्ष करीब 600 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होगी।
उद्योग मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस परियोजना के सिलसिले में हिमाचल के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए लंबी वार्ताएं कीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बैठकों में प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखा, जिसके परिणामस्वरूप ही राज्य के लिए अनुकूल शर्तें तय हो सकी हैं। चौहान के अनुसार, किशाऊ बांध परियोजना काफी समय से लंबित चल रही थी और अब इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है, जिसमें राज्य के वित्तीय हितों का पूरा ध्यान रखा गया है।
विपक्ष द्वारा किशाऊ परियोजना का श्रेय केंद्र सरकार को दिए जाने के सवालों का जवाब देते हुए उद्योग मंत्री ने कहा कि चुनावी वर्ष होने के कारण विपक्ष से सरकार की उपलब्धियों की सराहना की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपना काम कर रहा है और राज्य सरकार अपने दायित्वों का पालन निष्ठापूर्वक करेगी।
हर्षवर्धन चौहान ने भारतीय जनता पार्टी पर प्रदेश के हितों की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल के दौरान हिमाचल के अधिकारों की सुरक्षा पर्याप्त रूप से नहीं की गई। केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन भाजपा नेता इस मुद्दे पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों को उठाने में पूरी तरह विफल रही है।
इसके अलावा चौहान ने राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए विधायक स्वयं भाजपा को कमजोर करने में लगे हुए हैं और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर असंतोष है। उन्होंने कहा कि सत्ता में वापसी का सपना देख रही भाजपा के ये दावे धरातल पर कभी पूरे नहीं होंगे।
पत्रकारों से बातचीत के अंतिम चरण में उद्योग मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर टैक्स लगाए जाने के कदम पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के टैक्स का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव देश के मध्यम वर्ग तथा निम्न मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। चौहान ने आशंका जताई कि इस तरह के जनविरोधी फैसले के पीछे केंद्र सरकार पर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का दबाव हो सकता है।


















