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DSP Vijay Raghuvanshi Case: लंबे मेडिकल रेस्ट पर सख्त हुई हिमाचल सरकार, DSP विजय रघुवंशी की जांच करेगा IGMC का मेडिकल बोर्ड

Himachal Pradesh Police Controversy: हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीएसपी विजय रघुवंशी के लंबे मेडिकल रेस्ट पर गृह विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए आईजीएमसी शिमला में मेडिकल बोर्ड गठित किया है, जो उनकी बीमारी की जांच करेगा।
DSP Vijay Raghuvanshi Case: "प्रशासनिक कार्रवाई या सोची-समझी साजिश?" डीएसपी विजय रघुवंशी प्रकरण में तबादले से कथित जातिगत उत्पीड़न तक, जाने पूरी कहानी

DSP Vijay Raghuvanshi Case: हिमाचल प्रदेश पुलिस में DSP विजय रघुवंशी के मई 2026 से लगातार जारी मेडिकल रेस्ट को लेकर राज्य सरकार और गृह विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। 19 मई 2026 से लगातार स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर छुट्टी पर चल रहे डीएसपी रघुवंशी की सेहत और लंबे आराम की जरूरत का सच पता लगाने के लिए अब एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। गृह विभाग ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC), शिमला के विशेषज्ञों को इस जांच का जिम्मा सौंपा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विजय रघुवंशी ने कॉक्सीडीनिया नाम की बीमारी की शिकायत दर्ज कराई है। इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में तीव्र दर्द होता है, जिससे मरीज को बैठने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। हालांकि, विभाग ने पाया कि इससे पहले भी वह 12 मार्च से 10 मई 2026 तक अस्वस्थ होने का कारण बताकर अर्जित अवकाश पर रहे थे। इसके तुरंत बाद, 19 मई से वह फिर से लगातार मेडिकल रेस्ट पर चले गए।

गृह विभाग द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि 11 मई से 19 मई के बीच की अल्पावधि के दौरान भी उन्होंने अस्वस्थता का हवाला देकर उन्हें सौंपे गए महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों को पूरा नहीं किया। आईजीएमसी के हड्डी रोग विभाग की मेडिकल पर्चियों के आधार पर उनके मेडिकल रेस्ट की अवधि समय-समय पर बढ़ाई जाती रही। यह रेस्ट पहले 30 अगस्त तक स्वीकृत था, जिसे 31 अगस्त को जारी नई पर्ची के आधार पर चार सप्ताह और बढ़ाकर 27 सितंबर तक कर दिया गया।

लगातार छुट्टी पर रहने और नई तैनाती पर कार्यभार न संभालने की वजह से सक्षम प्राधिकारी ने मामले का गहन परीक्षण कराने का निर्णय लिया। आईजीएमसी के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया गया है। गठित मेडिकल बोर्ड में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि हड्डी रोग विभाग और मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि बतौर सदस्य शामिल रहेंगे। गृह विभाग ने बोर्ड से तीन दिनों के भीतर डीएसपी की बीमारी के इतिहास और मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

इसी बीच, 10 अगस्त 2026 को जारी सरकारी अधिसूचना के तहत विजय रघुवंशी का स्थानांतरण दूसरी भारतीय रिजर्व बटालियन (2nd IRBn) सकोह, जिला कांगड़ा में डीएसपी के पद पर कर दिया गया था। शिमला जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने पुलिस मुख्यालय और डीआईजी/एसआर कार्यालय से मिले निर्देशों का पालन करते हुए 16 सितंबर को आदेश जारी कर उन्हें डीएसपी मुख्यालय के पद से तत्काल प्रभाव से नई तैनाती के लिए रिलीव कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि डीएसपी विजय रघुवंशी का यह मामला केवल मेडिकल रेस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहले उनके द्वारा लगाए गए जातीय उत्पीड़न के आरोप भी काफी चर्चा में रहे हैं। रघुवंशी ने 3 जून 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके साथ जाति के आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवहार और प्रताड़ना की गई। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब एक अन्य पुलिस अधिकारी को लिफ्ट देने की घटना के बाद उनके खिलाफ कथित तौर पर कार्रवाई की गई और उनसे सरकारी वाहन वापस ले लिया गया।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इस शिकायत पर कड़ा संज्ञान लेते हुए 14 अगस्त को सुनवाई का नोटिस जारी किया था। आयोग ने मामले की व्यक्तिगत सुनवाई के लिए हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) तथा राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को 20 अगस्त को नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में उपस्थित होने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। आयोग की ओर से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश के बावजूद पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए। अब मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।

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