Bank Strike in Himachal: हिमाचल प्रदेश में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था और अन्य मांगों को लेकर बैंक कर्मचारियों ने शुक्रवार को हड़ताल की। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल का असर शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। राजधानी शिमला सहित अन्य जिला मुख्यालयों में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने धरना प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया।
यूएफबीयू हिमाचल के अनुसार, शिमला में आयोजित धरने में 300 से अधिक बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए। विभिन्न बैंकों और बैंक कर्मचारी संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भी इस प्रदर्शन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। यूनियन नेताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने को लेकर समझौता होने के बावजूद इस पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे बैंक कर्मचारियों के भीतर भारी नाराजगी है।
हिमाचल प्रदेश के नया जिलों में भी सैंकड़ों बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपना अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन दिया। इस देशव्यापी हड़ताल के कारण हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई, जिससे आम लोगों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग, नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप्स चालू रहे, जिससे लोगों को ऑनलाइन ट्रांसफर में थोड़ी राहत मिली। लेकिन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में, जहाँ लोग आज भी भौतिक रूप से बैंक जाने पर निर्भर हैं, वहाँ सबसे ज्यादा परेशानी देखी गई।
उधर, यूएफबीयू हिमाचल के राज्य संयोजक नरेंद्र शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक यूनियनों के बीच मार्च 2024 में 12वें द्विपक्षीय समझौते और नौवें संयुक्त नोट के तहत पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था को लागू करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद आवश्यक प्रस्ताव को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया था, लेकिन दो साल से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारी इसी प्रमुख मांग को लेकर लगातार सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं।
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में बैंकिंग सेवाओं का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों के जरिए उपलब्ध है। ग्राहकों को एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसी आधुनिक सुविधाएं लगातार मिल रही हैं। उनका तर्क है कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू होने से ग्राहकों को मिलने वाली आवश्यक बैंकिंग सुविधाओं पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। मार्च 2024 के समझौते के तहत शनिवार के साप्ताहिक अवकाश के बदले रोजाना के कामकाज के समय में 40 मिनट की बढ़ोतरी किए जाने पर भी सहमति बनी थी।
इसके अलावा, हिमाचल के बैंक कर्मचारी वित्तीय सेवा विभाग की नई प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई व्यवस्था का भी कड़ा विरोध कर रहे हैं। यूनियन का सीधा आरोप है कि इस नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग श्रेणी के बैंक कर्मचारियों के बीच प्रोत्साहन राशि में बहुत बड़ा अंतर रखा गया है। यूनियन ने इस विवादास्पद व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करने के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अन्य सभी लंबित मुद्दों पर तुरंत उच्च स्तर पर बातचीत शुरू करने की पुरजोर मांग की है।
प्रदर्शन के अंत में यूनियन ने सरकार और प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी सभी लंबित मांगों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो आगामी 28, 29 और 30 सितंबर को लगातार तीन दिनों तक फिर से देशव्यापी या प्रांतीय बैंक हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी यदि मांगों पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का कड़ा आह्वान किया गया है। यूनियन नेताओं ने एक बार फिर सरकार और बैंक प्रबंधन से अपील की है कि वे आपसी बातचीत के माध्यम से इन गंभीर मुद्दों का जल्द से जल्द समाधान निकालें।


















