Bahra University National Conference: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को एक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से बाहरा विश्वविद्यालय, शिमला हिल्स में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “Advanced Materials and Simulation Techniques” का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। 10 एवं 11 सितंबर को आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षण एवं शोध संस्थानों से आए विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
सम्मेलन में संत बाबा भाग सिंह विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, आईआईटी बॉम्बे, एमिटी विश्वविद्यालय, शूलिनी विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, डीआईटी विश्वविद्यालय देहरादून, किरोड़ीमल कॉलेज दिल्ली, रयात बाहरा प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी तथा NITTTR चंडीगढ़ सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। दो दिनों तक चले सम्मेलन में उन्नत सामग्री विज्ञान, सिमुलेशन तकनीकों, आधुनिक शोध पद्धतियों और इनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर गहन चर्चा हुई।
सम्मेलन का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में निरंतर हो रहे बदलावों के बीच शोध और नवाचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा शोधार्थियों को नई सोच के साथ आगे बढ़ने और अपने शोध को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने का संदेश दिया।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता प्रो. संदीप कुमार अग्रवाल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने उन्नत सामग्री एवं सिमुलेशन तकनीकों के क्षेत्र में हो रहे शोध और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आधुनिक सिमुलेशन तकनीकों के माध्यम से जटिल वैज्ञानिक समस्याओं को समझने और उनके प्रभावी समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

तकनीकी सत्रों में डॉ. संदीप चौहान एवं डॉ. रमेश ठाकुर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार और शोध अनुभव साझा किए। मनीषा कोहली ने तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रतिभागियों के शोध प्रस्तुतिकरण और वैज्ञानिक संवाद को दिशा प्रदान की। सम्मेलन के दौरान शोधार्थियों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने के साथ-साथ विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करने का महत्वपूर्ण अवसर मिला।
समापन समारोह में सेवानिवृत्त प्रोफेसर घनश्याम चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सम्मेलन की सफलता पर आयोजकों, प्रतिभागियों और शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजन युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ शोध के प्रति उनकी रुचि को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर बाहरा विश्वविद्यालय के चांसलर सरदार गुरविंदर सिंह बाहरा ने सभी प्रतिभागियों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं आयोजन समिति को सम्मेलन की सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा, “ज्ञान और शोध की कोई सीमा नहीं होती। ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नई सोच, नए अनुभव और नई संभावनाओं से जोड़ते हैं। मैं सम्मेलन में शामिल सभी प्रतिभागियों एवं युवा शोधार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं और आशा करता हूं कि वे अपने ज्ञान एवं प्रतिभा के माध्यम से देश और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.पी. नैण्टा, प्रो-वाइस चांसलर प्रो. सुशील चौधरी, रजिस्ट्रार विनीत कुमार तथा डीन एकेडमिक प्रो. सुमिता सूद ने भी सम्मेलन की सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि इस प्रकार के आयोजन विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार की संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कोन्फ्रेस् के कन्वीनर प्रो. गगन भार्गव ने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के आयोजन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को देश के विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों के साथ संवाद करने और अपने शोध को नई दिशा देने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सम्मेलन में पहुंचे सभी विशेषज्ञों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
कॉन्फ्रेंस के को-कन्वीनर डॉ. बी.के. शर्मा एवं डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने सम्मेलन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का धन्यवाद किया। वहीं आयोजन सचिव डॉ. इनेश, डॉ. पारुल शर्मा एवं डॉ. दिनेश ठाकुर ने सम्मेलन की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सम्मेलन के आयोजन में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के सभी संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों का विशेष योगदान रहा। उनके सामूहिक प्रयासों से दो दिवसीय सम्मेलन ज्ञान, शोध, संवाद और नवाचार का एक सार्थक मंच बनकर उभरा।
बाहरा विश्वविद्यालय में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन अपने पीछे केवल शोध-पत्रों और तकनीकी चर्चाओं की स्मृतियां ही नहीं छोड़ गया, बल्कि देश के विभिन्न संस्थानों से आए शिक्षाविदों और युवा शोधार्थियों के बीच नए विचारों, नए संपर्कों और नई संभावनाओं की मजबूत नींव भी रख गया। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि जब ज्ञान, शोध और युवा प्रतिभा एक मंच पर मिलते हैं, तो नई संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।


















