Solan Fast Track Court Verdict: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला सामने आया है। सोलन स्थित फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO) ने नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ बार-बार यौन उत्पीड़न करने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि समाज में नाबालिगों के प्रति होने वाले ऐसे गंभीर अपराधों पर कड़ा रुख अपनाना अनिवार्य है। न्यायिक दस्तावेजों के अनुसार, 25 सितंबर 2026 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO) सोलन की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
दोषी करार दिया गया आरोपी अनुभव उर्फ मोनू उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के बिलारी थाना क्षेत्र अंतर्गत अकबरपुर खास का निवासी है। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363, 366, 376, 34 और POCSO Act की धारा 6 के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि जुलाई 2021 से जुड़ी है। 12 जुलाई 2021 को पीड़ित नाबालिग के पिता विनोद कश्यप ने सोलन जिले के बद्दी थाने में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी अनुभव ने उनकी नाबालिग बेटी को उसके माता-पिता की कानूनी अभिरक्षा से बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया। इसके बाद वह पीड़िता को जबरन शादी के लिए मजबूर कर रहा था और इस दौरान उसने पीड़िता के साथ लगातार यौन अपराध को अंजाम दिया।
बद्दी पुलिस ने शिकायत मिलते ही मामले की गहन जांच शुरू की और साक्ष्यों को एकत्रित करते हुए अदालत में चालान पेश किया। मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध करने के लिए कुल 19 गवाहों की गवाही दर्ज कराई। अदालत में प्रस्तुत किए गए गवाहों के बयानों और पुलिस की फॉरेंसिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के दावे को बेहद मजबूत बनाया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष की विस्तृत दलीलें सुनने तथा साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को सभी संबंधित अपराधों में दोषी पाया। अदालत ने POCSO Act की धारा 6 के तहत आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 10,000 रुपये जुर्माना, तथा धारा 366 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास एवं 10,000 रुपये जुर्माने का आदेश दिया गया।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दोषी तय जुर्माना राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे संबंधित धाराओं के तहत अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष का सफल संचालन सोलन के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर बी.एस. नेगी द्वारा किया गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अभियोजन पक्ष के मजबूत तर्कों के बल पर यह आपराधिक मामला आरोपी की दोषसिद्धि के साथ संपन्न हुआ।


















