Himachal News: हिमाचल प्रदेश के हजारों जरूरतमंद परिवारों को ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ के तहत हर महीने ₹1500 की वित्तीय सहायता और 300 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ लेने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने पहले इस महत्वाकांक्षी योजना को गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को लॉन्च करने की योजना बनाई थी। हालांकि, नौवें चरण में प्राप्त हुए भारी संख्या में आवेदनों के सत्यापन का काम पूरा न होने के कारण निर्धारित तिथि पर इसका शुभारंभ टाल दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक राज्य के संबंधित विभाग फिलहाल प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी और पात्रता जांच में जुटे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन की यह विस्तृत प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक महीने का समय लग सकता है। इसके अतिरिक्त, योजना के क्रियान्वयन के लिए जरूरी दिशा-निर्देशों को भी अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
प्रशासनिक स्तर पर इन दोनों औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही योजना को धरातल पर उतारा जाएगा।योजना के शुभारंभ की नई तिथि की आधिकारिक घोषणा सरकार की ओर से अभी नहीं की गई है। हालांकि, कयास लगाए जा रहे हैं कि अब इसे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के दो साल पूरे होने के अवसर से जोड़ा जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि सुक्खू सरकार 11 दिसंबर को प्रदेश में अपना कार्यकाल पूरा करने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार के दो साल के इस पड़ाव पर आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय कार्यक्रम में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, सहित कई बड़े नेता शिरकत कर सकते हैं और वही इस योजना की औपचारिक शुरुआत कर सकती हैं। फिलहाल यह केवल संभावित योजना है और अंतिम निर्णय कैबिनेट स्तर पर लिया जाएगा।
बहुस्तरीय सत्यापन प्रक्रिया से गुजरेंगे आवेदन
सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र परिवारों तक ही पहुंचे। इसके लिए सत्यापन प्रक्रिया को कई स्तरों में विभाजित किया गया है:
- पंचायत स्तर: संबंधित पंचायत सचिव सबसे पहले प्राप्त आवेदनों और दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच करेंगे।
- खंड स्तर: इसके बाद ब्लॉक स्तर पर गठित विशेष कमेटी आवेदनों का पुन: सत्यापन करेगी।
- डिजिटल एंट्री: सत्यापन के बाद पंचायत सचिव पात्र आवेदकों का विवरण संबंधित सॉफ्टवेयर में दर्ज करेंगे।
- अंतिम स्वीकृति: खंड विकास अधिकारी (BDO) स्तर पर अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
- डीबीटी और बैंक सीडिंग: चयनित लाभार्थियों के खातों की बैंक सीडिंग और आधार लिंकिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी ताकि डीबीटी के जरिए राशि सीधे खाते में भेजी जा सके।
पात्रता और बहिष्करण के कड़े मानदंड
‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ में लाभार्थियों का चयन छह प्रमुख श्रेणियों के आधार पर किया जाएगा। इनमें अनाथ बच्चों वाले परिवार, केवल वृद्धों वाले परिवार, महिला मुखिया वाले परिवार जिसमे विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्त या अविवाहित शामिल है, 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले मुखिया के परिवार, गंभीर बीमारियों से पीड़ित या दुर्घटना के कारण बेडरिडन कमाने वाले सदस्यों के परिवार, और बीते वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत काम करने वाले परिवार शामिल हैं।
हालाँकि, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि मनरेगा में एक दिन के काम की अनिवार्यता वाली शर्त को हटाया जाएगा, जिससे गैर-मनरेगा परिवारों के लिए भी रास्ते खुलेंगे। इसके साथ ही, चयन प्रक्रिया में स्पष्ट बहिष्करण नियम भी लागू रहेंगे। यदि किसी परिवार का कोई सदस्य आयकर देता हो, परिवार की कुल वार्षिक आय ₹75,000 से अधिक हो, एक हेक्टेयर से अधिक भूमि हो, या परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी, अर्धसरकारी या निजी नौकरी में कार्यरत हो, तो उसे योजना से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ का मुख्य उद्देश्य राज्य के अति-निर्धन और वंचित वर्गों को सीधा सामाजिक-आर्थिक संबल प्रदान करना है। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को हर महीने 1,500 रुपये की सीधी नकद आर्थिक सहायता और 300 यूनिट मुफ्त घरेलू बिजली देने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। लेकिन लाभ सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित करने से पूर्व सरकार पात्रता को पूरी तरह से पारदर्शी बनाना चाहती है।


















