Prajasatta Side Scroll Menu
IEC University Bahra University - Shimla Hills

Nalagarh Temple Land Dispute: पूर्व विधायक पम्मी का दावा-150 करोड़ के घोटाले में फंसी नरसिंह मंदिर की जमीन , हाईकोर्ट ने भी दिए सख्त निर्देश

दून के पूर्व विधायक परमजीत पम्मी ने नालागढ़ में श्री नरसिंह जी मंदिर से जुड़ी ज़मीन के स्वामित्व व उसके अदला-बदली के मामले में कांग्रेस विधायक रामकुमार चौधरी और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए 150 करोड़ रुपये के ज़मीन घोटाले का दावा किया है।
Updated By Prajasatta
Published on: 14 अक्टूबर 2026
पूर्व विधायक पम्मी का दावा-150 करोड़ के घोटाले में फंसी नरसिंह मंदिर की जमीन , हाईकोर्ट ने भी दिए सख्त निर्देश

Nalagarh Temple Land Dispute: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बीबीएन क्षेत्र में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। दून के पूर्व विधायक परमजीत सिंह पम्मी ने वर्तमान कांग्रेस विधायक राम कुमार चौधरी और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए 150 करोड़ रुपये के ज़मीन घोटाले का दावा किया है। उन्होंने इसे बड़ा और अवैध भूमि घोटाला करार देते हुए पूरे प्रकरण की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

विज्ञापन

दरअसल, यह पूरा मामला नालागढ़ क्षेत्र के मौजा दादी भोला में स्थित ठाकुरद्वारा श्री नरसिंह जी मंदिर से जुड़ी 41 बीघा 10 बिस्वा ज़मीन के स्वामित्व और उसकी अदला-बदली से जुड़ा है। पूर्व विधायक परमजीत सिंह पम्मी के अनुसार, पूर्व समय में राजा बृजेंद्र सिंह के पूर्वजों ने 1730 बीघा जमीन मंदिर और गुरुद्वारों के नाम दान की थी, जिसमें नालागढ़ क्षेत्र के ठाकुरद्वारा श्री नरसिंह जी मंदिर के नाम दर्ज यह 41 बीघा 10 बिस्वा विवादित ज़मीन भी शामिल थी।

चूंकि यह ज़मीन मंदिर के नाम पर थी, इसलिए इसके रख-रखाव और ट्रस्ट से जुड़े लोग इसकी खरीद-फरोख्त नहीं कर सकते थे। लेकिन आरोप है कि साल 2014 में राम कुमार चौधरी ने लगभग 52 लाख रुपये में एक सस्ती ज़मीन खरीदी और साजिश के तहत प्रशासनिक मिलीभगत से मंदिर की इस बेशकीमती व प्राइम लोकेशन की   ज़मीन के साथ उसकी अदला-बदली करा ली।

रिकॉर्ड के मुताबिक 24 जुलाई 2017 को विधायक की पत्नी कुलदीप कौर के पक्ष में ज़मीन के तबादले की डीड को निष्पादित किया गया और इंतकाल भी मंजूर हो गया। हालांकि, लोगों के भारी विरोध के बाद 16 अप्रैल 2018 को यह इंतकाल रद्द कर दिया गया था। बढ़ते विवाद के कारण यह मामला कोर्ट में चला गया।

बता दें कि इसके बाद कुलदीप कौर ने इंतकाल रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दीवानी मुकदमा दायर किया। 26 अक्टूबर 2024 को अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। पूर्व विधायक पम्मी ने आरोप लगाया कि इसके बाद विधायक राम कुमार चौधरी की पत्नी ने कोर्ट में एक शपथ पत्र दिया, जिसमें यह दावा किया गया कि यह ज़मीन मंदिर की नहीं बल्कि ‘मठ’ की है। इस आधार पर 26 अक्टूबर 2024 को अदालत का फैसला उनके पक्ष में आ गया। पम्मी का यह भी आरोप है कि दो ट्रस्टियों से मिलीभगत कर उन्हें पैसे देकर इस अवैध ज़मीन के सौदे को अंजाम दिया।

गैर-उपजाऊ ज़मीन के बदले प्राइम ज़मीन और अवैध कटाई
पूर्व विधायक परमजीत सिंह पम्मी के अनुसार, बीड पलासी और पलासी कलां मौजा में आने वाली विधायक की जमीन जिसे वह उपजाऊ बतातें हैं वह ज़मीन तो सरसा नदी के बहाव क्षेत्र में वर्षों पहले बह चुकी थी और गैर-उपजाऊ थी। जिसे एक साजिश के तहत कम दामों पर खरीदकर प्रशासन की मिलीभगत से प्राइम लोकेशन वाली जमीन के साथ बदला गया।

पूर्व विधायक ने आगे आरोप लगाया कि इसके बाद अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दोबारा अदालत में ले जाया गया और याचिकाकर्ताओं को धमकाकर एकतरफा फैसला अपने पक्ष में कराया गया। उन्होंने कहा कि विधायक ने मंदिर कि जमीन में धोखे से अपने नाम करा कर घोर पाप किया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ज़मीन पर कब्जा सुनिश्चित करने के लिए रात के समय करीब एक हज़ार खैरों के पेड़ों को अवैध तरीके से कटवाकर एक फैक्ट्री में भेजा गया, जबकि अनुमति केवल कुछ ही पेड़ों को काटने की थी। उन्होंने कहा कि जानकारी मिलते ही वह ठेकेदारों के नाम भी सर्वजनिक करेंगे। पम्मी के मुताबिक, ज़मीन पर 15 लाख रुपये प्रति बिस्वा की दर से प्लॉटिंग, स्कूल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स का नक्शा तैयार किया गया।

उन्होंने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि मामला विवादित होने के चलते दूसरे पक्ष ने न्याय पाने के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, जिसमें मंदिर के ट्रस्टी और अन्य देखरेख करने वाले शामिल थे। हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।

मामले में हाईकोर्ट का कडा संज्ञान
उधर, इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने कड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की विकास गतिविधि पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सोलन के उपायुक्त और नालागढ़ के एसडीएम को आदेश का पालन सुनिश्चित करने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपी है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन न होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी। साथ ही, अदालत ने दीवानी मुकदमे का रिकॉर्ड तलब किया है और प्रतिवादी संख्या 12 से 19 तक को नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

Himachal High CourtNalagarh Temple LandParmjeet Singh PammiRam Kumar ChaudharySolan Land Scam

Join WhatsApp

Join Now