Himachali Folk Song Amma Puchdi Meaning: पारंपरिक लोकगीतों की अपनी एक विशिष्ट विशेषता होती है, जो बिना किसी संगीतकार या गायक के सीधे जनमानस के दिलों में उतर जाती है। फिल्मी गानों के बोल, संगीत और उसके गाने वाले हर कोई अपनी मेहनत करता है और तब जाकर एक गाना बनता है। लेकिन वहीं बात करें लोकगीतों की तो इसको बनाने के लिए न तो किसी संगीतकार की जरूरत होती है और न ही किसी सिंगर की। लोकल भाषा में बने ये गीत वहीं के लोगों की आवाज में ऐसे छाते हैं कि दिल में उतर जाते हैं।
आज हम आपको एक ऐसे ही हिमाचली पहाड़ियों से जुड़ा एक लोकगीत बताएंगे, जिसमें न तो कई फिल्मी हीरो है, न हीरोइन. लेकिन इस गीत के बोल और कहानी दिल को छू जाती है। हिमाचल प्रदेश और पंजाब में व्यापक रूप से सुने जाने वाले पहाड़ी लोकगीत ‘अम्मा पुछदी’ की कहानी कुछ ऐसी ही है। यह गीत किसी फिल्मी पटकथा पर आधारित नहीं है, बल्कि एक मां की फिक्र और उसकी बेटी के मन में छिपे प्रेम की एक सरल और भावुक अभिव्यक्ति है।
ब्रिटिश काउंसिल की लोकगीत शीट में भी इसे प्रामाणिक हिमाचली गीत के रूप में दर्ज किया गया है। दरअसल, ये लोकगीत असल में एक मां और बेटी के बीच की बातचीत की शैली में है, जिसमें मां अपनी बेटी से उसका हाल पूछती है और बेटी छिपे हुए अंदाज में अपने दिल का हाल बयां करती है। बता दें कि ये एक प्यार में पड़ी हुई बेटी का गाना है, जिसकी चिंता उसकी मां को होती है और गीत में बोलचाल की भाषा में रखते हुए, गाया जाता है। ये लोकगीत बहुत ही खूबसूरत है और इसकी धुन इतनी प्यारी है कि इसे एक बार सुनकर आपका दिल ही नहीं भरेगा।
अम्मा पूछदी सुन धिये मेरिये,
दुबली इतनि किन्या करी होई हो,
दुबली इतनि किन्या करी होई हो,
परली बनियाँ, मोर जो बोले हो,
परली बनियाँ, मोर जो बोले हो,
परली बनियाँ, मोर जो बोले हो,
परली बनियाँ, मोर जो बोले हो,
आमा जी इन मोर, निंदर गवैं हो,
आमा जी इन मोर, निंदर गवैं हो,
हो, आमा जी इन मोर, निंदर गवैं हो,
हो, आमा जी इन मोर, निंदर गवैं हो
मां की चिंता और बेटी का प्रतीकात्मक जवाब
इस पारंपरिक गीत की शुरुआत एक मां और बेटी के संवाद से होती है। मां अपनी बेटी की शारीरिक कमजोरी और उसकी रातों की गायब होती नींद को देखकर चिंतित हो जाती है। वह पूछती है कि उसकी बेटी इतनी दुबली क्यों होती जा रही है। इसके उत्तर में बेटी अपनी सीधी बात कहने के बजाय जंगल के पार बोलने वाले एक मोर का जिक्र करती है। वह अपनी मां को बताती है कि उस मोर की आवाज ने उसकी रातों की नींद छीन ली है। दरअसल, यह मोर कोई और नहीं बल्कि उस युवती का प्रेमी है, जिसके बारे में वह खुलकर बात करने में असहज महसूस करती है।
मोर को बचाने की जिद और प्रेम का अहसास
बेटी की परेशानी का समाधान निकालने के लिए जब मां कहती है कि वह शिकारी को बुलाकर उस मोर को मार गिराएगी ताकि उसकी बेटी चैन से सो सके, तो बेटी घबरा जाती है। वह तुरंत अपनी मां से अनुरोध करती है कि मोर को मारा न जाए, बल्कि उसे पिंजरे में सुरक्षित रखा जाए। बेटी की यह प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि वह अपने प्रेमी को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती है। गीत के इन बोलों में एक प्रेमिका का अपने प्रेमी के प्रति समर्पण और स्नेह स्पष्ट रूप से झलकता है, जो श्रोताओं को गहराई से प्रभावित करता है।
मां का परामर्श और मां-बेटी के रिश्ते की झलक
संवाद के अंतिम चरण में बेटी अपनी मां से यह सवाल करती है कि चांद, तारे और दिल के प्यारे लोग कहां चले जाते हैं। इस पर मां अत्यंत स्नेह के साथ समझाती है कि चांद-तारे तो छिप जाते हैं, किंतु जो लोग दिल के करीब होते हैं, वे कभी दूर नहीं होते।
ये गीत मां और बेटी के बीच के संबंध की खूबसूरती को दिखाता है। बेटी के लिए एक मां की फिक्र और बेटी कैसे अपने दिल की बात मां को कहती है, इसे बहुत ही खास अंदाजा में दिखाया गया है। इस गीत के अंत में दिखाया गया है कि कैसे मां अपनी बेटी को समझ जाती है और उसके दिल को दिलासा देती है।
गीत की लोकप्रियता
यह पारंपरिक गीत सिने अभिनेत्री कंगना रनौत का भी पसंदीदा लोकगीत है, जिसे उन्होंने हिमाचली परिधान में अपनी तस्वीरों के साथ साझा किया था। इसके अलावा, गायिका आकांक्षा भंडारी द्वारा अपनी डेब्यू ईपी राही के लिए गाए गए संस्करण को यूट्यूब पर 1.4 मिलियन से अधिक ज मिल चुके हैं, जो इस लोकगीत की प्रासंगिकता को दर्शाता है।


















