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Kullu Dussehra 2026: भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथ यात्रा से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का आगाज, दिव्य स्वर लहरियों से गुंजायमान हो उठी घाटी  

International Kullu Dussehra 2026: ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथ यात्रा के साथ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव 2026 की शुरुआत हो गई है। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता की मौजूदगी में शुरू हुए इस सात दिवसीय देव महाकुंभ में सैकड़ों देवी-देवता और श्रद्धालु शामिल हुए हैं।
Kullu Dussehra 2026: भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथ यात्रा से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का आगाज, दिव्य स्वर लहरियों से गुंजायमान हो उठी घाटी  

Kullu Dussehra 2026: हिमाचल प्रदेश की पावन देवभूमि कुल्लू के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में आस्था, परंपरा और समृद्ध लोक संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। बुधवार को सैकड़ों देवी-देवताओं के आगमन के साथ ही सात दिवसीय ‘अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव 2026’ का विधिवत आगाज़ हो गया है। दोपहर बाद जैसे ही भगवान रघुनाथ जी का रथ मैदान में पहुंचा, उसके बाद ‘जय श्री राम’ और भगवान रामचंद्र के गगनभेदी जयघोष के साथ ऐतिहासिक रथ यात्रा शुरू हुई।

भगवान रघुनाथ का रथ खींचने के लिए ढालपुर मैदान में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। हालांकि, बीते वर्ष की तुलना में इस बार रथ यात्रा अपने निर्धारित समय से लगभग 40 मिनट की देरी से शुरू हुई। इस ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महासंगम के शुभारंभ अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में विशेष रूप से उपस्थित रहे। रथ यात्रा के दौरान संपूर्ण कुल्लू घाटी ढोल-नगाड़ों, करनाल, नरसिंगा और शहनाई की मधुर एवं दिव्य स्वर लहरियों से गुंजायमान हो उठी।

कुल्लू दशहरा की देव परंपरा के अनुसार, भगवान रघुनाथ जी की रथ यात्रा के निकलते ही पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। ढालपुर मैदान में पहुंचे विभिन्न घाटियों के देवी-देवताओं और उनके साथ आए देवलुओं ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य कर अपनी समृद्ध संस्कृति का भव्य प्रदर्शन किया। कुल्लू दशहरा उत्सव का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। ढालपुर मैदान में देवी-देवताओं के इस भव्य आगमन की परंपरा वर्ष 1660 में शुरू हुई थी।

शुरुआती दौर में कुल्लू के तत्कालीन राजा स्वयं सभी देवी-देवताओं को इस उत्सव में शामिल होने के लिए निमंत्रण पत्र भेजा करते थे। समय बदलने के साथ अब इस परंपरा और प्रशासनिक जिम्मेदारी का निर्वहन जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में भाग लेने के लिए कुल 347 देवी-देवताओं को आधिकारिक निमंत्रण भेजा गया है। 21 से 27 अक्तूबर तक चलने वाले इस सात दिवसीय देव महाकुंभ के दौरान सैकड़ों देवी-देवता ढालपुर मैदान में अपने-अपने निर्धारित स्थानों और अस्थायी शिविरों में विराजमान रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त इस उत्सव को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए सांस्कृतिक संध्याओं का विशेष आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष उत्सव में इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका, रूस, थाईलैंड, मलेशिया, मिस्र, श्रीलंका और नेपाल समेत 10 देशों के सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जो वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रमुख केंद्र बनेगा।

सुरक्षा और व्यवस्था के दृष्टिकोण से प्रशासन ने अभेद्य इंतजाम किए हैं। पूरे उत्सव क्षेत्र की सुरक्षा की कमान 1265 पुलिस और सुरक्षा जवानों को सौंपी गई है। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने और भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पूरे मेला क्षेत्र की 155 सीसीटीवी कैमरों तथा आधुनिक ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में शामिल होने आए सैकड़ों देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में अगले सात दिनों तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान रोजाना सुबह और शाम विधि-विधान के साथ देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और आरती की जाएगी। सुबह से ही ढालपुर मैदान में धार्मिक गतिविधियों और देव परंपराओं का अनूठा माहौल देखने को मिल रहा है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और शास्त्रों के अनुसार संपन्न हो रहे धार्मिक कार्य अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा की मूल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को जीवंत बनाए हुए हैं।Kullu Dussehra 2026: भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथ यात्रा से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का आगाज, दिव्य स्वर लहरियों से गुंजायमान हो उठी घाटी  

इस दौरान राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि देव संस्कृति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम कुल्लू दशहरा को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है और इसे देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाता है। उन्होंने कहा कि परंपराएं केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए सामर्थ्य एवं मार्गदर्शन का स्रोत भी हैं। राज्यपाल ने कहा कि इन परंपराओं का संरक्षण करना और इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

विजयादशमी के संदेश का उल्लेख करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन समाज को सत्य, कर्तव्य, त्याग, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने लोगों से नशाखोरी, हिंसा, भ्रष्टाचार तथा समाज में वैमनस्य पैदा करने वाली शक्तियों जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया।

नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अपनाने की अपील करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने सभी से आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का विजन एक ऐसे भारत की परिकल्पना करता है जो आर्थिक रूप से समृद्ध, तकनीकी रूप से उन्नत, सामाजिक रूप से समरस और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हो। उन्होंने सभी से इस राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर बल देते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पर्वत, वन, नदियां और जैव विविधता हमारी अमूल्य प्राकृतिक संपदा हैं। प्रदेश की देव परंपराएं भी प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान और सह-अस्तित्व का संदेश देती हैं। इसलिए विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। यह उत्सव पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि उत्सव के आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचने चाहिए और इसके साथ ही इसकी पारंपरिक पहचान एवं प्रामाणिकता भी संरक्षित रहनी चाहिए।

राज्यपाल ने युवाओं से नशे से दूर रहने, नए कौशल अर्जित करने, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को अपनाने, पर्यावरण की रक्षा करने तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का भी आह्वान किया।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव आस्था, सांस्कृतिक गौरव, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की भावना को निरंतर सुदृढ़ करता रहेगा तथा हिमाचल प्रदेश की समृद्ध विरासत को देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा।

राज्यपाल ने भगवान रघुनाथ जी से हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश की शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। इसके उपरांत राज्यपाल ने विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों तथा गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और प्रदर्शित उत्पादों एवं सामग्री की सराहना की। इससे पूर्व कुल्लू पहुंचने पर राज्यपाल का भव्य स्वागत किया गया।

इस अवसर पर सर्वाेच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल, पूर्व सांसद एवं हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल, विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, विधायक सुंदर सिंह ठाकुर, भुवनेश्वर गौड़, लोकेन्द्र कुमार, सुरेंद्र शौरी, उपायुक्त अमित कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक अभिषेक एस. सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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