Prajasatta Side Scroll Menu
IEC University Baddi Bahra University - Shimla Hills Kullu Dussehra 2026 Celebration

चंडीगढ़ में तैनात ISS अधिकारी आयुषी मिश्रा को Himachal High Court से बड़ी राहत, IPS गौरव सिंह के खिलाफ कानूनी पेचीदगियां बढ़ीं

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ में तैनात आईएसएस अधिकारी आयुषी मिश्रा को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज FIR में कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
चंडीगढ़ में तैनात ISS अधिकारी आयुषी मिश्रा को Himachal High Court से बड़ी राहत, IPS गौरव सिंह के खिलाफ कानूनी पेचीदगियां बढ़ीं

Himachal High Court: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ में पदस्थ केंद्र सरकार की वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) की अधिकारी आयुषी मिश्रा को एक बड़े मामले में कानूनी राहत प्रदान की है। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिका संख्या Cr. MMO No. 1185/2026 पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में पुलिस को किसी भी प्रकार की दंडात्मक या कठोर कार्रवाई करने से पूरी तरह रोक दिया है। इस न्यायिक हस्तक्षेप से याचिकाकर्ता को फौरी तौर पर कानूनी सुरक्षा मिल गई है।

दरअसल, यह पूरा कानूनी विवाद पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक मनमुटाव और उसके बाद दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता आयुषी मिश्रा का विवाह आईपीएस अधिकारी गौरव सिंह के साथ 2023 में हुआ था, जो पूर्व में सोलन जिले में बतौर पुलिस अधीक्षक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि घरेलू हिंसा के विवाद, मारपीट और तलाक की चल रही अर्जियों के बीच उनके ससुराल पक्ष की ओर से उनके साथ मारपीट और जान से मार देने की धमकी का गंभीर कदम उठाया गया। इसके अलावा द्वेषपूर्ण तरीके से उनके खिलाफ सोलन सदर थाने में चोरी और आपराधिक धमकी जैसे मामलों में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

ससुराल पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई थी एफआईआर नंबर 101/2025
प्राप्त जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता की सास किरण देवी द्वारा सोलन सदर थाने में एक मामला (FIR No. 101/2025) दर्ज करवाया गया था। इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं यानी 305, 331(3), 351(2) और 352 के तहत आरोप लगाए गए थे। इन धाराओं में चोरी, गृह-अतिचार और आपराधिक धमकी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। याचिकाकर्ता का पक्ष है कि यह पूरा मामला तथ्यात्मक रूप से निराधार है और वैवाहिक विवाद की पृष्ठभूमि में द्वेषवश तैयार किया गया है।

सर्विस बंदूक से जान से मारने की धमकी देने का आरोप
आयुषी मिश्रा ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और इस एफआईआर को पूरी तरह से रद्द करने की मांग की। याचिका में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया कि जब उनके पति द्वारा आगरा और वर्तमान जयपुर कुटुंब न्यायालय में तलाक की याचिका दाखिल की गई थी, तब यह लिखित रूप से स्पष्ट किया गया था कि सभी आभूषण और स्त्री-धन याचिकाकर्ता के पास ही सुरक्षित हैं। इसके बावजूद बाद में सोलन में दर्ज कराई गई एफआईआर में यह दावा किया गया कि आभूषण सोलन स्थित अलमारी से चुराए गए हैं, जो बयानों के विरोधाभास को दर्शाता है।

इस मामले में याचिकाकर्ता आयुषी मिश्रा द्वारा प्रस्तुत याचिका में प्रतिवादी संख्या 5, आईपीएस गौरव सिंह पर मारपीट करने और अपनी सर्विस बंदूक से जान से मारने की धमकी देने का बेहद ही गंभीर आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार इस घटना के बाद उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए सोलन स्थित अपने ससुराल से निकलने का फैसला किया।

चंडीगढ़ में तैनात ISS अधिकारी आयुषी मिश्रा को Himachal High Court से बड़ी राहत, IPS गौरव सिंह के खिलाफ कानूनी पेचीदगियां बढ़ीं

देरी से दर्ज मामले और परस्पर विरोधी बयानों पर उठाए गए गंभीर सवाल
याचिकाकर्ता के वकीलों द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष यह मजबूत आधार भी रखा गया कि कथित घटना के लगभग 136 दिन बीत जाने के बाद यह एफआईआर दर्ज कराई गई। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इतनी लंबी देरी और वैवाहिक मुकदमों के बीच यह शिकायत केवल एक “काउंटर-ब्लास्ट” यानी जवाबी कार्रवाई के रूप में की गई है। अदालत के समक्ष रखे गए इन तथ्यों ने मामले की प्रामाणिकता और दुर्भावनापूर्ण मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिन्हें उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लिया है।
चंडीगढ़ में तैनात ISS अधिकारी आयुषी मिश्रा को Himachal High Court से बड़ी राहत, IPS गौरव सिंह के खिलाफ कानूनी पेचीदगियां बढ़ीं

मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के प्रतिवादियों (संख्या 1 से 3) जिसमे हिमाचल प्रदेश सरकार (गृह सचिव), पुलिस अधीक्षक (सोलन) तथा थाना प्रभारी (सोलन सदर पुलिस स्टेशन) तीनों को नोटिस स्वीकार करने के निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इसके साथ ही अन्य प्रतिवादियों को भी विधिवत नोटिस जारी किए गए हैं। न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि इस एफआईआर के आधार पर याचिकाकर्ता के विरुद्ध फिलहाल कोई भी कठोर दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर 2026 को होगी।

Ayush Mishra ISSHimachal High CourtHimachal NewsIPS Gaurav SinghSolan Police

Join WhatsApp

Join Now